पावर कार्पोरेशन के सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार के इस आदेश से प्रदेश में बिजली संकट खड़ा होना तय है। बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति को देखते हुए प्रदेश में बिजली की उपलब्धता 5000-6000 मेगावाट कम हो जाएगी। ऐसे में शहरों से लेकर गांवों तक आपात कटौती करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
बिजली कंपनियों का 21000 करोड़ बकाया
प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों पर उत्पादन कंपनियों का 21 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया है। दरअसल, प्रदेश में जितनी बिजली आपूर्ति की जा रही है उस अनुपात में राजस्व वसूली नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से उत्पादन कंपनियों को नियमित रूप से भुगतान नहीं हो पा रहा है। बिजली वितरण कंपनियां हर महीने उत्पादन कंपनियों से 4500 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिजली खरीद रही हैं जबकि उन्हें भुगतान 3500-3600 करोड़ रुपये ही हो पा रहा है। हर महीने 900-1000 करोड़ रुपये बकाया बढ़ता जा रहा है।
केंद्र ने बिजली खरीदने के लिए उत्पादन कंपनियों को एडवांस भुगतान करने का निर्देश जारी किया है। यह एक अगस्त से लागू होना है। हमने आज दिल्ली में केंद्रीय बिजली मंत्रालय के अधिकारियों से मिलकर अपनी समस्या बताई है लेकिन यह निर्देश सभी राज्यों के लिए हुआ है। फिलहाल केंद्र से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। अभी जो स्थितियां बन रही हैं उसमें बिजली की कमी होना तय है। बिजली कटौती करनी पड़ सकती है। - आलोक कुमार, प्रमुख सचिव ऊर्जा व अध्यक्ष पावर कार्पोरेशन