पावर कॉर्पोरेशन में जेई भर्ती परीक्षा के 17 अक्तूबर को जारी परिणामों पर अंगुलियां उठनी शुरू हो गई हैं। कुछ अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर दोबारा कराई गई भर्ती परीक्षा में भी गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं।
सबसे बड़ा आरोप दो पालियों में परीक्षा कराने और पूर्व की परीक्षा में धांधली के आरोपियों को दोबारा मौका देने का है। अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से अनियमितताओं की जांच कराने और भविष्य में परीक्षाएं एक ही पाली में कराने की मांग की है।
कई अभ्यर्थियों के हस्ताक्षर से मुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाए गए हैं कि प्रथम पाली के छात्र 155 अंक पाने के बावजूद असफल रहे हैं, जबकि दूसरी पाली में 132 अंक पाने वाले छात्र सफल घोषित कर दिए गए। अभ्यर्थियों ने सुबूत के तौर पर ज्ञापन के साथ आंसर शीट भी संलग्न की है।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि विज्ञापन में प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए पदों की संख्या से दोगुना अभ्यर्थियों को बुलाने की बात कही गई थी, लेकिन दोगुने से 47 अधिक अभ्यर्थियों को बुलाया गया। इसी तरह मानकीकरण की आड़ में दोनों पाली के कटऑफ में 25 से 30 अंकों का अंतर है। दोनों पालियों में प्रश्नपत्र का स्तर एक ही होने के बावजूद प्रथम पाली में मात्र 10 से 20 फीसदी अभ्यर्थी सफल हुए हैं।
वहीं, दूसरी पाली के 80 से 90 फीसदी अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए हैं। अभ्यर्थियों ने कहा है कि इससे ज्यादा अभ्यर्थियों वाली परीक्षा एक ही पाली में कराई गई है जबकि मात्र 30 हजार अभ्यर्थियों की यह परीक्षा दो पाली में कराई गई।
ज्ञापन में कहा गया है कि पावर कॉर्पोरेशन ने परीक्षा परिणाम 17 अक्तूबर को इसलिए जारी करके प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए 28 व 29 को बुलाया है, जिससे छुट्टियों के चलते पीड़ित अभ्यर्थियों को अपना पक्ष कहीं रखने का मौका न मिले।
अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जेई भर्ती परीक्षा परिणाम रद्द कर दोबारा संशोधित परिणाम जारी कराया जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। अभ्यर्थियों ने एक ही पाली में परीक्षा कराने और एक ही कट ऑफ जारी करने के निर्देश देने की मांग की है।
उधर, पावर कॉर्पोरेशन के निदेशक (कार्मिक प्रबंध एवं प्रशासन) एसपी पांडेय का कहना है कि अभ्यर्थियों की ओर से उठाई गई कोई भी आपत्ति उनके संज्ञान में नहीं है। आंसर शीट जारी करने के साथ अभ्यर्थियों को आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया गया था। परीक्षा व कटऑफ में किसी तरह की कोई अनियमितता नहीं हुई है।