शुक्रवार को आयोग के सभागार में सार्वजनिक सुनवाई के दौरान मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन में संशोधन पर चर्चा हुई। आयोग के अध्यक्ष आरपी सिंह की अध्यक्षता में सदस्य कौशल किशोर शर्मा व विनोद कुमार श्रीवास्तव की पूर्ण पीठ ने सुनवाई की। पावर कॉर्पोरेशन ने कुछ आपत्तियों के साथ नियामक आयोग के समक्ष अपना लिखित सुझाव प्रस्तुत किया।
उपभोक्ताओं की तरफ से पक्ष रखते हुए राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इन्क्रीमेंटल कॉस्ट के नाम पर बिजली दरों में वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए कानून में बदलाव जरूरी है। कई राज्यों में किसानों व बीपीएल पर कोई इन्क्रीमेंटल कॉस्ट नहीं लगता क्योंकि यह सब्सिडी वाली श्रेणी है।
ऐसी व्यवस्था यूपी में भी होनी चाहिए। विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के तहत बिजली कंपनी के लिए सरकार से सहमति लेना अनिवार्य किया जाए। अनमीटर्ड उपभोक्ताओं से पैसा लेने के बाद भी उनके यहां मीटर नहीं लगाया गया है, इसलिए उनके ऊपर भी इन्क्रीमेंटल कॉस्ट नहीं लागू होनी चाहिए।