यूपी विधानसभा में मिला संदिग्ध पाउडर पीईटीएन विस्फोटक नहीं था। सरकार की ओर से जारी बयान में इसकी पुष्टि की गई है। वहीं, पीईटीएन के नाम पर सरकार को हिला देने वाले विधि विज्ञान प्रयोगशाला के निदेशक श्याम बिहारी उपाध्याय को सोमवार को निलंबित कर दिया गया। उन पर पिछले डेढ़ महीने से तलवार लटकी थी। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि उपाध्याय पर लगे गंभीर आरोपों के कारण उन्हें सस्पेंड किया गया है। उन पर लगे सभी आरोपों की जांच सतर्कता अधिष्ठान के निदेशक हितेश अवस्थी करेंगे।
अरविंद कुमार ने बताया कि उपाध्याय को जिन आरोपों में निलंबित किया गया है। उनमें विधानसभा के मंडप में मिले संदिग्ध पाउडर को लेकर सरकार को भ्रामक सूचना देने, संदिग्ध पदार्थ की जांच एक्सपायरी किट से कराने, पदार्थ की जांच गैर विशेषज्ञ और विस्फोटक अनुभाग के बजाय दूसरे विभाग से कराने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। श्याम बिहारी उपाध्याय पर लगे सभी आरोपों की जांच सतर्कता अधिष्ठान के निदेशक करेंगे।
12 जुलाई को विधानसभा के मंडप में मिले जिस संदिग्ध पदार्थ को लेकर इतना हंगामा हुआ था और मुख्यमंत्री ने भी इसे आतंकी साजिश का हिस्सा तक करार दे दिया वह संदिग्ध पदार्थ पीईटीएन नहीं बल्कि सिलिकॉन ऑक्साइड क्वार्ट्ज था। सरकार ने पहली बार इस बात को स्वीकार किया है।
विधान भवन के मंडप में सीट नंबर 80 के नीचे से मिले इस पदार्थ को डॉ. उपाध्याय ने अपने स्तर से कराई गई जांच में पीईटीएन बता दिया था, जबकि एनआईए द्वारा हैदराबाद स्थित केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला में कराई गई जांच में विस्फोटक के कोई कण नहीं पाए गए।