भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि लखनऊ में किसानों ने आलू फेंककर सांकेतिक विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि सरकार को 16 मंत्रालयों की एक कमेटी बनानी चाहिए जो किसानों को बताए कि प्रदेश में कितने आलू, कितनी सब्जी और कितने अनाज की जरूरत है। कई देशों में ऐसी व्यवस्था है।
भाकियू के मंडल अध्यक्ष हरनाम सिंह का कहना है कि सरकार ने 487 रुपये क्विंटल आलू खरीदने का दावा किया था लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। जो थोड़ी बहुत खरीद हुई, वह आलू की ग्रेडिंग करके हुई। उन्होंने सवाल किया कि बड़ा और छोटा आलू कहां जाएगा?
सड़े हुए थे आलू, नमूने की कराई जाएगी जांच
एसएसपी का कहना है कि राजभवन और विधानसभा भवन के आसपास जो आलू फेंके गए हैं, वह सड़े हुए थे। आलू का नमूना जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है। 31 दिसंबर को कोल्ड स्टोरेज बंद हो जाते हैं। हो सकता है कि फेंका गया आलू लोडर चालक ने अपने घर पर रखा हो और वह खराब हो गया हो। आलू सड़ने के बाद उसने शरारत के इरादे से उसे राजभवन व विधानभवन के सामने फेंक दिया हो।