लखनऊ। केजीएमयू में पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रो. वेदप्रकाश के मुताबिक, देश में बढ़ता प्रदूषण और धूम्रपान क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) की वजह बन रहा है। प्रो. वेदप्रकाश विश्व सीओपीडी दिवस की पूर्व संध्या पर मंगलवार को विभाग में आयोजित प्रेसवार्ता में बोल रहे थे।
प्रो. वेदप्रकाश ने बताया कि सीओपीडी सांस संबंधी गंभीर बीमारी है। इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए नवंबर के तीसरे बुधवार को सीओपीडी दिवस मनाया जाता है। प्रदूषण के साथ ही धूम्रपान, चूल्हे से निकलने वाले धुआं और लंबे समय तक बने रहने वाले फेफड़े का संक्रमण भी बीमारी की वजह बनते हैं। बीमारी के लक्षण 30 वर्ष की उम्र के बाद दिखने शुरू होते हैं।
सुबह-सुबह खांसी आने के साथ इसकी शुरुआत होती है। इसके बाद साल भर खांसी और बलगम भी आने लगता है। बीमारी बढ़ने पर रोगी की सांस भी फूलने लगती है। सीओपीडी से फेफड़े के साथ ही दिल, गुर्दा व अन्य अंग भी प्रभावित होते हैं। उन्होंने बताया कि सीओपीडी से होने वाली कुल मौतों में से 25 फीसदी मौतें अकेले अपने देश में होती हैं। इस मौके पर प्रो. राजेंद्र प्रसाद, प्रो. आरएएस कुशवाहा और डॉ. संदीप गुप्ता भी मौजूद रहे।
महिलाओं में बीमारी बढ़ने की आशंका
प्रो. वेदप्रकाश ने बताया कि देश में करीब 5.5 करोड़ से अधिक लोग सीओपीडी से पीड़ित हैं। महिलाओं में बढ़ती धूम्रपान की प्रवृत्ति और खाना पकाने की वजह से उनमें इस बीमारी के बढ़ने की आशंका है।
इनहेलर है सबसे अच्छा इलाज
केजीएमयू में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रो. सूर्यकांत के अनुसार इनहेलर इसका सबसे प्रभावी इलाज है। यह सीधे फेफड़े में पहुंचता है, जबकि बाकी दवाएं खून में जाती हैं। इसलिए इनहेलर के दुष्प्रभाव भी कम हैं।
सीओपीडी के सामान्य लक्षण
पुरानी खांसी, सांस लेने में तकलीफ, घरघराहट, सीने में जकड़न, थकान, बार-बार सांस का संक्रमण, अनपेक्षित वजन घटना।