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सुख भरे दिन बीते रे...

Wed, 25 Jun 2014 09:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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कहते हैं कि दुख भरे दिन नहीं रहेंगे तो सुख भरे दिन भी नहीं रहेंगे। ऐसा ही कुछ एक अधिकारी के साथ हुआ।
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जोड़तोड़ के सहारे वह बाबू से अधिकारी बनने में कामयाब हो गए और प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था की कमान अपने हाथ में ले ली। चाहे जो भी सत्ता में आए वह उसके खास।
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चाहे जो भी कुलपति आए वह उनके काबू में, पर इस बार उनका दांव कुछ उल्टा पड़ा गया। अब वह भागे-भागे घूम रहे हैं। सब कुछ मैनेज करने में जुटे हुए हैं, पर चीजें पटरी पर आने का नाम नहीं ले रही हैं। इस बीच नई मुसीबत आन पड़ी।
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यह मुसीबत पुराने राज्यपाल के जाने और भाजपाई राज्यपाल के आने की आहट से शुरू हो गई है।

कहा जा रहा है कि भाजपा का राज्यपाल आएगा तो कुलपति और पावरफुल हो जाएंगे। मामला अगर राजभवन चला गया तो उनके लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
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