एक राष्ट्रीय पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का अंदाज इन दिनों एकदम बदला-बदला सा है। जब उन्हें शुरुआत में इस पद की जिम्मेदारी मिली तो पांव जमीन पर नहीं थे।
कार्यकर्ताओं से मिलने-जुलने से हमेशा परहेज करते थे। ऑफिस आते थे तो अपने ही कमरे तक ही सीमित रहते।
कुछेक लोगों को छोड़कर बाकी लोगों से उनकी मुलाकात बड़ी मुश्किल से होती थी लेकिन चुनाव में पार्टी का सूपड़ा साफ होने के बाद अध्यक्ष जी की पूरी टीम की ही छुट्टी कर दी गई। अब वह अकेले बचे हैं।
उन्हें भी पता है कि देर-सवेर उनकी भी छुट्टी होनी है। लिहाजा अब उनके मिजाज भी बदल गए हैं। पिछले दिनों वे पार्टी के प्रदेश कार्यालय आए तो अपने कमरे में बैठने के बजाय ऑफिस के सभी कमरों में गए।
नेताओं से लेकर कर्मचारियों तक से पूरी गर्मजोशी से मिले। इसके बाद मीडिया विभाग में भी गए और काफी देर तक बैठे रहे।
उनके इस बदले अंदाज को देखकर सभी हैरान हैं। अब तो ऐसी भी चर्चाएं होने लगी हैं कि अगर समय रहते सुधर गए होते तो कम से इतनी फजीहत तो न होती।