कहते हैं कि तरक्की की राह शिक्षा से खुलती है। इसका जीता-जागता उदाहरण अपने चचा हैं।
शिक्षा विभाग में चचा के नाम से मशहूर यह महोदय भले ही रिटायर हो गए हैं पर उनका विभाग से मोहभंग नहीं हो पा रहा है। वह किसी भी सूरत में विभाग में अपनी पकड़ बनाए रखना चाहते हैं।
बताते हैं कि इसके चलते ही वह पर्दे के पीछे से नित नए खेल खेलते रहते हैं। इन दिनों चर्चा शिक्षा चयन बोर्ड को लेकर है। चयन बोर्ड में सरकार से नामित माननीय और अफसरों में ठनी हुई है।
कहते हैं कि इसके पीछे कहीं न कहीं चचा ही हैं। वह अपना भविष्य देख रहे हैं। फिलहाल चयन बोर्ड का काम कार्यवाहक चेयरमैन के सहारे चलाया जा रहा है।
इसके लिए चचा और एक रिटायर्ड आईएएस रेस में हैं। कहते हैं कि चचा पहले तो रिटायर नहीं होना चाहते थे, लेकिन अब हो ही गए हैं तो उनकी नजर इस कुर्सी पर है।
विभाग में चर्चा तो इस बात की भी है कि चयन बोर्ड का मामला जितना उलझेगा, चचा की राह उतनी ही आसान होगी।