मजदूरों के महकमे के वजीर ने नवाबी शहर रामपुर में चाय की चुस्की क्या ले ली, सियासी प्याली में तूफान आ गया।
शहर से जुड़े आला मिनिस्टर को यह नागवार गुजरा। उनके समर्थकों ने तत्काल इसे संभल की सियासत से जोड़ दिया।
दरअसल, संभल से चुनाव जीतने वाले तालीमी महकमे के वजीर और मजदूरों के विभाग के फक्कड़ अंदाज वाले वजीर की जोड़ी खूब चर्चित भी है और रामपुर वाले मिनिस्टर साहब का सिरदर्द भी। सरकार को अपनी अंगुलियों पर नचाने वाले मिनिस्टर साहब भला ये कैसे बर्दाश्त करते।
सो कह रहे हैं कि अपनी ही पार्टी के कुछ लोगों की नजर उनके रामपुर पर है। वे उन लोगों को शह दे रहे हैं जो यूनिवर्सिटी के विरोधी हैं।
पर फक्कड़ अंदाज वाले वजीर भी पीछे हटने को तैयार नहीं। कह रहे हैं कि उन्हें नहीं मालूम था कि रामपुर जाने के लिए किसी से पासपोर्ट लेने की जरूरत है। देखना है वजीरों का यह झगड़ा किस मोड़ पर पहुंचता है?