बुनियादी सुविधा मुहैया कराने वाले विभाग के नवाब साहब के बारे में कौन नहीं जानता है। उनके तेवर के आगे अच्छे-अच्छे पानी मांगते हैं।
लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद से तो उनके मातहत अधिकारी बेहद सहमे से हैं। वैसे तो विभागीय-अधिकारियों में उनका खौफ सदा ही बना रहता है लेकिन इधर यह चर्चा कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है।
कहते हैं कि नवाब साहब का मूड अब हमेशा उखड़ा रहता है, चेहरे से हंसी काफूर हो चुकी है। अब तो जरा-जरा सी बात पर उखड़ जाते हैं।
इसलिए बहुत कम अधिकारी उनके पास जाना चाहते हैं, मजबूरी में यदि किसी को जाना भी पड़े तो पहले वह उनके स्टाफ से उनके मूड के बारे में जांच-परख करता है।
मिजाज अगर राजी-खुशी होने की पुख्ता खबर मिलती है, तब ही उनका सामना करने की हिम्मत दिखता है अन्यथा बहाने तलाशता है।