भाजपाइयों का जवाब नहीं। उपचुनावों की घोषणा अभी हुई नहीं है कि उनके दिल मचलने लगे हैं।
एक नेताजी ने तो कमाल ही कर दिया। हर चुनाव में लखनऊ की विरासत के दावेदार बनने वाले ये नेताजी उम्मीदवार बनने से पहले ही 2017 के चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं।
घर पर जमने वाली चौपाल में वे बाकायदा इसका अभ्यास करने लगे हैं। वे नाम लेकर बताते हैं कि फलां सांसद बन गए।
अमुक को लोकसभा चुनाव में किनारे करके यह साफ कर दिया गया है कि आगे उन्हें कुछ नहीं मिलने वाला। ऐसे में उनके अलावा दूसरा ब्राह्मण चेहरा है ही कौन, जिसे विधानसभा चुनाव में आगे करके पार्टी चुनाव लड़े।
खैर यह तो रही नेताजी की दलील। पर, उनके शुभचिंतक परेशान हैं कि दिन में सपना देख रहे पंडितजी के अरमानों पर कहीं पानी न फिर जाए।