नगर में समाजसेवा का पर्याय बन चुकीं ‘राजधानी की रानी जी’ पद्मश्री रानी
लीला रामकुमार भार्गव नहीं रहीं।
लंबे समय से बीमार चल रहीं रानी लीला
रामकुमार भार्गव ने रविवार सुबह एसजीपीजीआई में अंतिम सांस ली।
पिछले करीब
तीन माह से फेफड़ों में संक्रमण के चलते वे पिछले करीब तीन महीने से यहां
भर्ती थी। विडंबना देखिए शनिवार को ही उनका 92वां जन्मदिन मनाया गया था।
शहर
की पहचान माने जाने वाल मुंशी नवल किशोर के प्रपौत्र राजा रामकुमार भार्गव
के साथ 1938 में उनका विवाह हुआ था।
वर्ष 1971 में उनकी सेवाओं के लिए
भारत के राष्ट्रपति ने उन्हें पद्मश्री से नवाजा, जबकि इसे पहले प्रदेश
सरकार ने बाढ़ की विभीषिका में उनके सराहनीय कार्यों के लिए प्राण रक्षा
पदक से भी सम्मानित किया था।
उनके परिवार में तीन पुत्र पद्मश्री डॉ.
रणजीत भार्गव, लव भार्गव, कुश भार्गव और पुत्री रीता सिंह हैं।
रानी लीला
रामकुमार भार्गव के निधन पर राज्यपाल बीएल जोशी समेत नगर की तमाम शख्सियतों
ने शोक जताया है। उनके पुत्र लव भार्गव ने बताया कि सोमवार को सुबह 10 बजे
बैकुंठ धाम पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।