मथुरा में जवाहर बाग को खाली कराने के लिए तत्कालीन एसएसपी राकेश सिंह ने रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की मांग की थी। यह मांग 31 मई को प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पंडा और डीजीपी जावीद अहमद से हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में की गई थी।
इस पर डीजीपी ने आरएएफ उपलब्ध कराने की सहमति दी थी। यही नहीं, दो कंपनी महिला पुलिस बल की भी मांग हुई थी। इसके बावजूद दो जून को बगैर आरएएफ वहां ऑपरेशन शुरू हो गया।
बता दें, हाईकोर्ट के फैसले के बाद शासन के अधिकारी जवाहर बाग खाली कराने की योजना में जुट गए थे। इस दौरान प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पंडा व डीजीपी जावीद अहमद ने मथुरा के अफसरों से तीन बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की।
आखिरी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग 31 मई को हुई। इसमें एसएसपी ने एक जून को ही ऑपरेशन शुरू करने की बात कही थी। जबकि आगरा के कमिश्नर ऑपरेशन तीन/चार जून की सुबह चार बजे शुरू कराना चाहते थे।
इसके बावजूद ऑपरेशन अचानक दो जून की शाम में शुरू कर दिया गया। इस पर डीजीपी जावीद अहमद यह कहते हैं कि दो जून को पुलिस रेकी करने गई थी।
लिहाजा यह सवाल उठता है कि क्या रेकी करने पुलिस फुल ड्रेस में सभी को बताने के बाद जाती है। जब रेकी करने पुलिस गई तो उसने जवाहर बाग की दीवार क्यों तोड़ी? यह ऐसे प्रश्न हैं जिसका जवाब देने से पुलिस के आला अधिकारी बच रहे हैं।