...मेज पर खुली पड़ीं कानूनी किताबें। ...चाय की ट्रे लेकर खड़ा अर्दली। ...लैपटॉप में आंखें गड़ाए दरोगा और मोबाइल फोन कान पर लगाए एसएसपी प्रवीण कुमार।
शायद किसी अफसर को अपडेट कर रहे हैं, ‘जी सर, लिखा-पढ़ी चल रही है। चार-साढ़े चार बजे तक हो जाएगी।
हां-हां शाम को ही पेश करेंगे।’ एक फोन होल्ड भी है। फोन काटने के बाद उस पर बातचीत शुरू हो जाती है।
कमांड पर सोमवार सुबह से शाम तक यही आपाधापी चलती रही। मोहनलालगंज कांड में सवालों में घिरी पुलिस सोमवार सुबह से ही अपना होमवर्क मजबूत करने में जुट गई थी।
अपनी थ्योरी सही साबित करने की कोशिश
एसएसपी प्रवीण कुमार ने एएसपी ग्रामीण सौमित्र यादव, सीओ मोहनलालगंज राजेश यादव और इंस्पेक्टर संतोष सिंह को कैंप कार्यालय बुलवा लिया था। अपनी थ्योरी को सही साबित करने के लिए अफसर कोई चूक नहीं करना चाहते थे।
चाय की चुस्कियों के बीच एसएसपी खुद एक-एक बिंदु पर अफसरों से चर्चा कर रहे थे। आईपीसी के पन्ने पलटते-पलटते अचानक कुछ याद आता और पीआरओ को बुलाने के लिए घंटी बजा देते। किताब पीआरओ की तरफ बढ़ाते हुए कोई प्रिंटआउट निकालने को कहा।
उधर, आगंतुकों के बैठने की जगह पर एक दीवान रजिस्टर में कार्बन लगाकर लिखने में व्यस्त है। मेज पर एक सीलबंद हेलमेट रखा है। एक गत्ते के डिब्बे में कुछ अन्य सीलबंद सामान हैं। हरे रंग की पॉलीथिन में कुछ कागज रखे हैं।
बचते रहे मीडिया से
मीडियाकर्मी गत्ते के डिब्बे में झांकने लगे तो दीवान ने उसे अपनी तरफ खींच लिया। कुछ पत्रकारों ने रजिस्टर में क्या लिखा-पढ़ी चल रही है, यह जानने की कोशिश की तो दीवान सतर्क हो उठा।
अपना चश्मा केस में रखकर रजिस्टर बंद कर दिया। इसी बीच एएसपी ग्रामीण कमरे से निकले। ‘...सब देख लिया न, कोई कमी न रह जाए।’ उन्होंने एक दरोगा की तरफ देखते हुए यह सवाल उछाला। जवाब आया ‘जी सर’।
दरोगा ने सतर्क होते हुए फाइल संभाल ली। वह एसएसपी के कमरे में चले गए तो फोन पर बात करते हुए सीओ निकल आए। सर्विलांस सेल की तरफ गैलरी में चले गए। गैलरी में ही इंस्पेक्टर संतोष सिंह कुछ पुलिसकर्मियों को निर्देश दे रहे थे।
आरोपी को लेकर भी चिंता
पुलिस को आशंका थी कि महिला से हैवानियत का आरोपी राम सेवक यादव खुद को नुकसान पहुंचा सकता है। यही वजह थी कि पुलिस चिंतित दिख रही थी।
शाम करीब पांच बजे लिखा-पढ़ी पूरी करके पुलिस राम सेवक को कोर्ट में पेश करने के लिए तैयार हो गई। कमांड हाउस से निकले एएसपी ग्रामीण ने दरोगा को ताकीद दी।
पूछा, ‘फॉरेंसिक रिपोर्ट की कॉपी है ना।’ दरोगा ने भी ‘जी सर’ कहते हुए कांख में दबी फाइल तुरंत संभाली। ‘चलो टाइम हो गया है। जल्दी कोर्ट पहुंचो।’
यह कहते हुए अफसर नीली बत्ती लगी जीप में सवार हो गए। तीन-चार गाड़ियों का काफिला भी उनके पीछे-पीछे ही कमांड से निकल गया।