फिरोजाबाद में सपा नेता की शिकार बनी गैंगरेप पीड़िता के लिए पुलिस लापरवाह बनी हुई है।
एक दिन पहले जांच अधिकारी के नदारद रहने के बाद बुधवार को भी पीड़िता के एबॉर्शन के बाद भ्रूण का नमूना डीएनए जांच को नहीं लिया जा सका।
दबाव बढ़ने के बाद अस्पताल बंद होने पर जांच अधिकारी सामने आए। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेंस एसोसिएशन (एडवा) की अध्यक्ष मधु गर्ग ने बताया कि मंगलवार को ही जांच अधिकारी की मौजूदगी में गर्भपात होना था।
भ्रूण को डीएनए जांच के लिए फोरेंसिक लैब को नमूना सुरक्षित कर देना था। मंगलवार को बहानेबाजी कर पूरे समय जांच अधिकारी राकेश सिंह गायब रहे। इसके चलते नमूना लिए जाने की प्रक्रिया पूरी नहीं कराई जा सकी।
बुधवार को भी जांच अधिकारी ने सुबह तो आने से ही मना कर दिया। डीजीपी से शिकायत करने की बात से दबाव बढ़ने पर वह दोपहर बाद अस्पताल का कार्य समय खत्म होने पर पहुंचे।
अब गुरुवार को डीएनए जांच के लिए नमूना गर्भपात के बाद दिलाया जाएगा। एडवा के मुताबिक, पूरे मामले में कई नए तथ्य सामने आए हैं। इसमें पुलिस की बड़े स्तर पर लापरवाही और सपा नेता को बचाने के लिए कारस्तानी शामिल है।
इसकी वजह से हमारी मांग है कि इस केस को लखनऊ ट्रांसफर किया जाए। इससे निष्पक्ष जांच पूरे मामले की कराने में संस्था को मदद मिलेगी।
पुलिस की सपा नेता को बचाने केलिए की गई कारगुजारी की शिकायत पीड़िता के साथ करने केलिए एडवा ने जल्दी ही डीजीपी से मिलने की बात कही है।
पीड़िता 14 दिसंबर से लखनऊ में अपने न्याय की लड़ाई लड़ रही है। एडवा को पीड़िता का परिवार 23 दिसंबर को मिला।