शूटर जितेंद्र को शुक्रवार देर रात एसीपी कैंट कार्यालय के पास आलमबाग के देवी खेड़ा में मुठभेड़ में पुलिस ने दबोचा था। इस दौरान दोनों ओर से करीब तीन राउंड फायरिंग हुई थी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में शूटर गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने मौके से पिस्तौल, कारतूस व बाइक बरामद की थी।
दूर करना चाहता था दीपेंद्र की परेशानी
पुलिस के मुताबिक जितेंद्र शुरू से मनबढ़ था। उसके खिलाफ रायबरेली कोतवाली में कई बार शिकायतें र्हुइं, पर पुलिस में कुछ लोगों का करीबी होने से वह मामले मैनेज करता रहा। उस पर मारपीट व धमकी, बलवा के केस हैं। जितेंद्र ने पुलिस को बताया कि उसका चचेरा भाई दीपेंद्र काफी परेशान था।
पूछने पर उसने स्मृति से संबंध के बारे में बताया। कहा कि दोनों शादी करना चाहते हैं, लेकिन रणजीत बाधक बन रहा है। उसे रास्ते से हटाना होगा। दीपेंद्र की परेशानी दूर करने के लिए जितेंद्र उसके साथ काम करने को तैयार हो गया।
रणजीत बच्चन हत्याकांड में पुलिस ने लिया इस सीसीटीवी का सहारा।
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जितेंद्र ने बताया कि वारदात की सुबह वह दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के पास पहुंचा तो देखा रणजीत के साथ आदित्य भी था। उसे सरकारी गनर समझकर रुक गया। इसके बाद मंदिर से चंद कदम आगे जाकर जितेंद्र ने शराब पी और दोनों का पीछा करना शुरू किया।
ग्लोब पार्क के पास उसने पहले रणजीत का मोबाइल मांगा। विरोध पर पिस्तौल निकाल ली। इस पर रणजीत ने मोबाइल दे दिया। आदित्य का भी मोबाइल छीनने के बाद जितेंद्र ने रणजीत को गोली मार दी। इस पर आदित्य ने शोर मचाना शुरू कर दिया।
जितेंद्र ने बताया कि वह आदित्य पर गोली नहीं चलाना चाहता था, लेकिन वह शोर मचा रहा और भाग भी नहीं रहा था। ऐसे में गुस्से में उस पर भी गोली चला दी। इसके बाद दीपेंद्र और जितेंद्र चिरैया झील, बैंकुठ धाम होते हुए हैदरगढ़ और फिर रायबरेली भाग गए।
हत्याकांड के बाद पुलिस ने कई जगह दबिश दी। कुछ लोगों से पूछताछ की। इसमें दीपेंद्र की प्रेमिका स्मृति भी शामिल थी। वहीं, अगली सुबह अखबारों में सीसीटीवी फुटेज प्रकाशित हुई, जिसमें जितेंद्र व दीपेंद्र साथ दिखे। इसकी जानकारी पर दोनों सोमवार दोपहर बस से प्रयागराज पहुंचे। वहां से ट्रेन से मुंबई रवाना हो गए।
जब पुलिस ने उनके घर से चालक संजीत को दबोच लिया तो दोनों ने आत्मसमर्पण की तैयारी कर ली। इसके लिए मुंबई से अलग होकर निकले, जिससे लखनऊ पहुंचने के दौरान कोई एक पकड़ा जाए तो दूसरा कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दे। लेकिन इसके पहले पुलिस ने दीपेंद्र और फिर एक दिन बाद जितेंद्र को दबोच लिया।
पहले से रखता था मुंगेर की पिस्टल
पुलिस के मुताबिक जिस पिस्तौल से रणजीत की हत्या की गई, वह .32 बोर की है। यह मुंगेर की बनी है। प्रभारी निरीक्षक आलमबाग आनंद कुमार शाही के मुताबिक जितेंद्र काफी पहले से अवैध तरीके से पिस्तौल रखता था। इससे वह रायबरेली में लोगों को धमकाता भी था। जब साजिश रची गई तो जितेंद्र ने अपनी पिस्तौल से हत्या करने की हामी भर दी।
रणजीत बच्चन हत्याकांड के खुलासे के लिए पुलिस कमिश्नर ने कुल आठ टीमें बनाई थी। पुलिस की सभी टीमें पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय के निर्देशन में काम कर रही थीं। मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी जेसीपी नवीन अरोड़ा व नीलाब्जा चौधरी को दी गई थी। दोनों जेसीपी ने डीसीपी दिनेश सिंह, एडीसीपी चिरंजीव नाथ सिन्हा, एडीसीपी क्राइम दिनेश पुरी, एसीपी अभय कुमार मिश्रा से लगातार प्रगति रिपोर्ट ले रहे थे।
हत्याकांड का खुलासा कर आरोपियों को दबोचने में क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर संतोष कुमार सिंह व अजय त्रिपाठी की टीम ने चालक संजीत और स्मृति वर्मा को गिरफ्तार किया। वहीं, साइबर क्राइम सेल के एसआई राहुल सिंह राठौर, नरही चौकी प्रभारी भूपेंद्र सिंह, सुल्तानगंज चौकी प्रभारी महेंद्र सिंह, साइबर क्राइम सेल के हेड कांस्टेबल फिरोज बदर की टीम ने मुख्य आरोपी दीपेंद्र को दबोचा।
उधर शुक्रवार देर रात को शूटर जितेंद्र को इंस्पेक्टर आलमबाग आनंद कुमार शाही, हजरतगंज धीरेंद्र प्रताप कुशवाहा, साइबर क्राइम सेल के कांस्टेबल शरीफ खां, अखिलेश कुमार, हजरतगंज के कांस्टेबल मोनू, आलमबाग के अखिलेश कुमार, दिनेश ने मुठभेड़ में दबोच लिया।
रणजीत बच्चन की हत्या में शामिल शूटर जीतेंद्र पर पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय ने बृहस्पतिवार को 50 हजार रुपये का इनाम घोष्ज्ञित किया था जिसे 24 घंटे बाद बढ़ाकर 75 हजार कर दिया।