इसी तरह के एक अन्य मामले में सहायक विकास अधिकारी, समाज कल्याण शिवशंकर को वर्ष 1994 से बर्खास्त किया गया था। उनकी लंबी गैरहाजिरी के कारण बर्खास्तगी का यह आदेश वर्ष 2000 में जारी हुआ। जब शिवशंकर की मृत्यु हुई तो उनके पुत्र हेमंत कुमार ने मृतक आश्रित के रूप में नौकरी मांगी। इसे अधिकारियों की मिलीभगत से स्वीकार कर लिया गया। गड़बड़ी सामने आने पर दोनों को ही बर्खास्त करना पड़ा है।
‘अमर उजाला’ में इन दोनों मामलों के खुलासे के बाद तत्कालीन अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण मनोज सिंह ने वर्ष 1999 से लेकर अब तक यानी पिछले 20 साल में मृतक कोटे से विभाग में हुई भर्तियोें की जांच के आदेश निदेशक को दिए। यह जांच अभी चल रही है। इसी बीच पुलिस इंटेलिजेंस ने शुक्रवार को जांच शुरू कर दी और समाज कल्याण निदेशालय जाकर तथ्य जुटाए हैं।
उधर, समाज कल्याण निदेशालय में ही तैनात दो और बाबुओं के खिलाफ जांच उपनिदेशक जे राम कर रहे हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक यह जांच पूरी हो चुकी है। यहां भी बड़ी अनियमितताएं मिली हैं। हालांकि कोरोना संक्रमित होने के कारण जे राम रिपोर्ट अभी नहीं दे पाए हैं।