एक ही मुकदमा और समान धाराएं। गिरफ्तारी के लिए सरकारी दावे। फिर भी पुलिस की कार्रवाई एकतरफा रही।
जहां मुजफ्फरनगर दंगे में दर्ज रिपोर्ट में नामजद भाजपा विधायक सुरेश राणा की गिरफ्तारी में एसटीएफ तक का सहयोग ले लिया गया।
इसी मामले में नामजद दूसरे भाजपा विधायक हुकुम सिंह को गिरफ्तार करने में पुलिस की कोई दिलचस्पी नहीं दिखी।
भाजपा के चार विधायकों सुरेश राणा, संगीत सोम, हुकुम सिंह और भारतेंदु को मुजफ्फरनगर दंगे में दर्ज मुकदमे में नामजद किया गया था। इन भाजपा विधायकों के अलावा बसपा के भी कुछ विधायकों के नाम इस रिपोर्ट में हैं।
नामजद विधायकों को गिरफ्तार करने के लिए राज्य सरकार ने गुरुवार को बयान जारी किया था कि विधान सभा सत्र की समाप्ति के बाद नामजद जन प्रतिनिधियों की गिरफ्तारी का सिलसिला शुरू किया जाएगा।
सरकार ने अपने दावे को अमली जामा पहनाते हुए शुक्रवार शाम को भाजपा विधायक सुरेश राणा को नाटकीय तरीके से गिरफ्तार कर लिया। सूत्रों की मानें तो अधिकारियों ने सुरेश राणा की निगाहबीनी कर रखी थी और एसटीएफ को भी उनकी लोकेशन पर नजर रखने के लिए कहा हुआ था।
इसी वजह से जैसे ही सुरेश राणा भाजपा कार्यालय से निकल कर गोमतीनगर की ओर बढ़े पुलिस उनके पीछे लग गई। पुलिस ने हजरतगंज के व्यस्त इलाके में उन्हें नहीं रोका बल्कि समता मूलक चौक से आगे खाली सड़क पर रोक कर हिरासत में ले लिया गया।
हैरत की बात यह रही कि सत्र के बाद भाजपा विधायक हुकुम सिंह भी शहर में ही मौजूद थे, पर पुलिस ने न पहले और न ही अब उन्हें दबोचने में कोई रुचि दिखाई। जबकि बाकी के दो नामजद विधायक संगीत सोम और भारतेंदु लखनऊ में मौजूद नहीं थे।
इतना ही नहीं हुकुम सिंह को जब साथी विधायक की गिरफ्तारी की जानकारी हुई तो वह भी गोमतीनगर थाने पहुंच गए। लेकिन पुलिस ने उन्हें वहां भी गिरफ्तार नहीं किया। गोमतीनगर पुलिस ने यह स्वीकार किया कि विधायक हुकुम सिह वहां पहुंचे थे पर खुद की सफाई यह कहकर दे दी कि हुकुम सिंह थाने के बाहर से ही वापस चले गए थे।
यहां सवाल यह पैदा होता है कि जब पुलिस की जानकारी में था कि जिन नामजद विधायकों की गिरफ्तारी करे जाने के राज्य सरकार ने बमुश्किल चौबीस घंटे पहले दावे भरे थे, उनमें से एक उसके सामने था पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
वह भी तब जबकि शाम को गिरफ्तार हुए विधायक सुरेश राणा और नजरअंदाज कर दिए गए विधायक हुकुम सिंह दोनों एक ही मुकदमे में समान धाराओं में नामजद हैं।
‘किसी को छोड़ा नहीं गया है। उन्हें भी गिरफ्तार करेंगे। पहले उनकी गिरफ्तारी हो रही है जिनका दोष अधिक गंभीर पाया जा रहा है।’ -आरएम श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव गृह