गौरी हत्याकांड में शुक्रवार को पुलिस को एक और ठोस सुबूत हाथ लगा है। एक सीसीटीवी कैमरे के फुटेज में हिमांशु प्रजापति बाइक के पेट्रोल टैंक पर बैग रखकर जाता नजर आया है।
खास बात यह है कि इलाके के अनेक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज नष्ट होने के बाद पुलिस को सुबूत जुटाने की सुधि आई है। डीजीपी एके जैन की सख्ती पर पीजीआई पुलिस ने इलाके के विभिन्न स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने शुरू किए।
तेलीबाग में हिमांशु प्रजापति के घर से कुछ दूर सेक्टर-7 के मोड़ पर लगे सीसीटीवी कैमरे से ठोस सुबूत हाथ लगा है। इस कैमरे में हिमांशु प्रजापति 1 फरवरी को देरशाम अपनी बाइक की टंकी पर बड़ा बैग रखकर जाते नजर आया है।
अंधेरे की वजह से धुंधले फुटेज को साफ कराने के लिए डीवीआर को कब्जे में लेकर विशेषज्ञों के पास भेजा गया है। शहीद पथ की तरफ नहर के किनारे लगे एक सीसीटीवी कैमरे ने पुलिस को निराश किया। उसमें सिर्फ 48 घंटे के फुटेज सुरक्षित रखने की क्षमता थी।
पुराने फुटेज को रिकवर करने में आई दिक्कत
पुराने फुटेज को रिकवर करने में विशेषज्ञों ने असमर्थता जताई है। सवालों की फेहरिस्त तैयार कर रही पुलिस गौरी हत्याकांड के मुख्य आरोपी हिमांशु प्रजापति का पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए अभी कोर्ट में अर्जी नहीं दी गई है।
सीओ कैसरबाग राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि विभिन्न स्थानों के सीसीटीवी फुटेज व अन्य पुख्ता सुबूत एकत्र करने के साथ सवाल तैयार किए जा रहे हैं।
पूरी तैयारी करके हिमांशु का पुलिस कस्टडी रिमांड लिया जाएगा। किसी भी सवाल पर टालमटोल या झूठ बोलने की स्थिति आने पर पुलिस उसकी काट सामने रखेगी।इस तरह सच उगलवाने के साथ उसकी निशानदेही पर हत्याकांड से जुड़ी अन्य वस्तुएं बरामद करने की कोशिश की जाएगी।
सुबूत जुटाने के लिए खरीदवाए ईको पार्क के टिकट
विधि छात्रा गौरी का गला दबाने के बाद उसके दोस्त हिमांशु ने फंदे से बचने के सुबूत जुटाने की कोशिश की थी। उसने दोस्त के साथ मॉडल शॉप में जाम लड़ाने के बाद ईको पार्क के दो टिकट खरीदे थे।
गौरी हत्याकांड में गिरफ्तार हिमांशु प्रजापति ने वीडियो कैमरे के सामने पूछताछ में खुलासा किया था कि गुस्से में गौरी का गला दबाया और उसकी मौत का अहसास होने पर घबरा गया था।
थोड़ी देर कमरे में रहकर खुद को सामान्य किया। इसके बाद शव ठिकाने लगाने और खुद के बचने की योजना बनाने के लिए घर पर ताला लगाकर निकल पड़ा।
दोस्त अनुज गौतम के साथ मॉडल शॉप में बैठकर जाम लड़ाया। इस दौरान गौरी के मोबाइल पर कॉल आई तो हड़बड़ा गया। अनुज से कुछ दूर हटकर कॉल रिसीव की और गौरी की तबीयत खराब होने व ईको पार्क के पास मौजूद होने की बात कही। इसके साथ वह अनुज को साथ लेकर ईको पार्क गया।
खुद बाइक लेकर सड़क पर खड़ा रहा और अनुज को टिकट लेने भेजा। वह दो टिकट लेकर लौटा तो पार्क में घूमने का इरादा टालने की बात कहकर टिकट अपने कब्जे में ले लिए।
अनुज ने क्यों नहीं पहचाना हिमांशु को
हिमांशु ने सोचा था कि कभी जरूरत पड़ी तो ईको पार्क में मौजूदगी साबित कर दूंगा। अनुज गौतम को साक्ष्य छुपाने का आरोपी ठहरा रही पुलिस का कहना है कि लाटूश रोड के सीसीटीवी कैमरे से मिले फुटेज को जारी करने के साथ बाइक सवार पर दस हजार का इनाम घोषित किया गया था।
अखबारों में प्रमुखता से छपे बाइक सवार के फोटो में हेलमेट की वजह से चेहरा भले स्पष्ट न हो लेकिन हुलिए व बाइक के आधार पर उसे आसानी से पहचाना जा सकता था। अनुज गौतम ने भी फोटो देखा। हिमांशु व उसकी बाइक को पहचानने के बाद भी पुलिस को सूचना नहीं दी।
संदेह यह भी है कि नशा चढ़ने पर हिमांशु ने अपने जिगरी दोस्त को हत्या का राज बताया होगा। इसकी पुष्टि के लिए विभिन्न बिंदुओं पर तहकीकात चल रही है। हिमांशु का बयान था कि गौरी का शव ठिकाने लगाने के लिए उसने अनुज को बुलाया था। मॉडल शॉप तक सोचता रहा कि उसे कैसे बताऊं?
दरअसल उसे एक कार की तलाश की। अनुज के पास गाड़ी न होने की वजह से उसके आगे हत्या का राज उजागर नहीं किया। काफी देर साथ में रखा ताकि वह विभिन्न स्थानों पर साथ रहने गवाही दे सके।