फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुलिस ने साढ़े पांच लाख के लिए बेगुनाहों को बना दिया शूटर

Sat, 21 Jan 2017 04:09 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
विज्ञापन
डेमो
विज्ञापन
बाप बड़ा न भइया...सबसे बड़ा रुपइया। जी हां, यह रुपइया ही था जिसके लिए खाकी वाले अपराधी बन गए। पड़ताल में सामने आया है कि बेटे की हत्या के केस की पैरवी कर रहे बुजुर्ग श्रवण साहू को फंसाने के लिए पुलिसकर्मियों की हत्या आरोपी अकील अंसारी से साढ़े पांच लाख रुपये में ‘ब्लैक डील’ हुई थी। यही साढ़े पांच लाख थे जिसके लिए पुलिसकर्मी चार बेगुनाहों की जिंदगी नर्क बनाने पर उतारू हो गए।
विज्ञापन


अपने बैडवर्क को ‘गुडवर्क’ की शक्ल देने में पुलिसकर्मियों ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। कोई शक-सुबहा न रहे इसके लिए दरोगा-सिपाहियों ने पिस्टल तक का इंतजाम कर डाला।

अकील ने भी इशारे पर नाच रही खाकी की मदद की और तमंचा मुहैया करा दिया। तहकीकात कर रहे अफसरों को हत्या आरोपी व पुलिसकर्मियों की डील के पुख्ता सुबूतों की तलाश है। 
विज्ञापन


पड़ताल में सामने आया है कि बर्खास्त किए गए पुलिसकर्मी मुफ्त में ही हत्या आरोपी के इशारे पर नहीं नाच रही थी। एएसपी सिटी पूर्वी शिवराम यादव, सीओ आलमबाग अमित सिंह और इंस्पेक्टर पारा श्याम नारायण सिंह ने 10 जनवरी को क्राइम ब्रांच की स्वाट टीम प्रभारी धीरेंद्र कुमार शुक्ला द्वारा पारा थाने में कामरान, अफजल, तमीम और मो. अनवर के खिलाफ शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज कराए चार मुकदमों की छानबीन शुरू कर दी है।

चारों युवकों की गिरफ्तारी में शामिल पांच दरोगाओं व सात सिपाहियों में से तीन की बर्खास्तगी, पांच के निलंबन और चार के लाइन हाजिर होने के बाद आपसी खींचतान के साथ इनके राज उजागर होने शुरू हो गए हैं। 
Trending Videos
विज्ञापन

चर्चा में मुंगेर वाली ‌प‌िस्टल

डेमो
अफसरों को भनक लगी कि अकील अंसारी के बर्खास्त दरोगा धीरेंद्र शुक्ला, कांस्टेबल धीरेंद्र यादव व अनिल सिंह से दोस्ताना संबंध थे और पकड़ने-छोड़ने की डील होती थी।

आयुष साहू की हत्या के केस की उसके पिता श्रवण साहू की ठोस पैरवी से परेशान अकील ने तीनों के साथ मिलकर साजिश रची। असलहों के इंतजाम व अन्य पुलिसकर्मियों को साथ लेकर मजबूत कार्रवाई के एवज में 5.50 लाख में डील हुई। 

सुगबुगाहट ये है कि बर्खास्त दरोगा धीरेंद्र शुक्ला ने एसओ गोमतीनगर रहने के दौरान मुंगेर की बनी पिस्टलें पकड़ी थीं, जो खाली हाथ हत्थे चढ़े किसी अपराधी के कब्जे से बरामद दिखाने के लिए सुरक्षित रखे थे। अकील ने एक तमंचे के इंतजाम के साथ चार युवकों को पकड़वाया। खुद को बेकुसूर बताते एक-दूसरे पर लगाए जा रहे इल्जामों की अफसर जांच कर रहे हैं।  

ठाकुरगंज व सआदतगंज इलाके में छानबीन में उजागर हुआ कि अकील अंसारी ने करीब 15 साल पहले पुलिस की मुखबिरी शुरू की थी। चोरी की गाड़ियों के साथ कई अपराधियों को गिरफ्तार कराया।   पुलिस वालों को दोस्त बनाया और डील शुरू की। अपराधियों से भी रिश्ते बनाए। अफसरों को विभिन्न स्थानों से चुराई 10 बाइक में 7-8 की बिक्री और 2-3 की बरामदगी के खेल की जानकारी मिली है।
  अकील अंसारी ने अपने करीबी थानेदार, चौकी इंचार्ज व अन्य पुलिसकर्मियों को अनेक गुडवर्क कराए। खास बात यह थी कि इन पुलिसकर्मियों ने चोरी के जो वाहन बरामद किए वे अन्य इलाकों से चुराए गए थे।  
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें