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रैंकिंग फर्जीवाड़े मामले में आईएएस अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज करने वाले इंस्पेक्टर लाइन हाजिर

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राज्य नियोजन विभाग में आवासीय विद्यालय में रैंकिंग के फर्जीवाड़े का मुकदमा महानगर थाने में दर्ज हुआ। इस मामले में दो आईएएस अधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी व अंकित अग्रवाल को आरोपी बनाया गया है।
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इसका समाचार प्रकाशित होने के बाद महानगर के प्रभारी निरीक्षक यशकांत सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया है। उनकी जगह पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर ने आलमबाग से प्रदीप सिंह को भेजा है।
वहीं, कोरोना सेल में तैनात अशोक कुमार सिंह को आलमबाग का प्रभारी निरीक्षक बनाया है। महानगर के प्रभारी निरीक्षक यशकांत सिंह को दो आईएएस अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज करने की सजा मिल गई।
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उन्होंने बिना उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाए मुकदमे को दर्ज किया। शनिवार को जब इसकी खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो उच्चाधिकारियों को भी नहीं पता था कि इस मुकदमे के आरोपियों में दो आईएएस अधिकारी भी हैं।
आनन-फानन में डीसीपी उत्तरी, एडीसीपी उत्तरी से सवाल जवाब किया गया। लेकिन सभी ने इसकी जानकारी होने से इनकार कर दिया।
यहां तक कि इंस्पेक्टर को भी नहीं पता था कि आईएएस अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। जब एफआईआर की प्रति निकाली गई तो उसमें भी कहीं पीड़िता ने दोनों नाम के सामने आईएएस अधिकारी होने का जिक्र नहीं किया था।
रविवार सुबह जब इसकी पूरी जानकारी पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर प्रभारी निरीक्षक यशकांत सिंह को लाइन हाजिर कर दिया है।
डीसीपी उत्तरी रईस अख्तर के मुताबिक, मुकदमा दर्ज करने के दौरान प्रभारी निरीक्षक की लापरवाही सामने आई है।
उन्होंने सभी आरोपियों के बारे में बिना जानकारी हासिल किए मुकदमा दर्ज कर लिया। इस मामले की जांच कराई जा रही है। जो भी अन्य पुलिस कर्मी दोषी होंगे उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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