लक्ष्मनपुर गंगापुर स्थित पुोटो स्टेट की दुकान से मिले पश्चिम बंगाल के आधार कार्ड।
श्रावस्ती। नूरी बाबा के पाकिस्तान प्रेम की गुत्थी सुलझी नहीं थी कि अब उसका पश्चिम बंगाल का कनेक्शन भी सामने आ गया है। कभी उसके मदरसे में शिक्षक तो कभी आने वाले मेहमानों को लेकर भी सवालिया निशान लगने लगे हैं। उसके विश्वास पात्र के फोटो स्टेट दुकान पर मिले आधार कार्ड की छाया प्रति के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं नूरी बाबा का बांग्लादेश या रोहिंग्या कनेक्शन भी तो नहीं था।
मल्हीपुर थाना क्षेत्र के ग्राम लक्ष्मनपुर गंगापुर स्थित मदरसा दारुल उलूम फैजुर्रनबी का प्रबंधक मुबारक अली उर्फ नूरी बाबा की गुत्थी लगातार उलझती जा रही है। गांव में जाकर मुबारक कबाड़ का थोक व्यापारी बन गया। इससे मिली पहचान ने उसे नूरी बाबा बना दिया जो टोना-टोटका और तंत्र-मंत्र भी करने लगा। पहचान और बढ़ी तो फायदा उठाकर वह महानगरों सहित नेपाल, बांग्लादेश, महाराष्ट्र सहित अन्य मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में जाकर खुद को धर्मगुरु बताने लगा। इसके बाद उसने गांव में मदरसा स्थापित किया। जानकारों का कहना है कि इस मदरसे में पढ़ाने के लिए वह बाहर से महिलाएं व पुरुषों को बुलाने लगा। इनकी पहचान छिपाने के लिए उन्हें अलग-अलग जिलों का निवासी बताता रहा। इसी में वह गोंडा की युवती भी थी, जिसके साथ दुष्कर्म के आरोप में फंसा तो निकाह कर लिया।
पश्चिम बंगाल के युवकों के मिले आधार कार्ड
बुधवार को नूरी बाबा के एक विश्वासपात्र की फोटो स्टेट की दुकान पर उसके कराए गए फोटो स्टेट को खंगाला गया। इसमें पश्चिम बंगाल के वीरभूमि के बोनहा बोनहा पायकर वीरभूम, बोनहा बीरभूम वेस्ट बंगाल निवासी आसराफ होसेन पुत्र मुयाक्तार व पश्चिम बंगाल के ही बोनहा वीरभूम निवासी असादुल्ला पुत्र मुजफ्फर का आधार मिला तो सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि यह मदरसा शिक्षक हैं। ऐसे में कहीं यह बांग्लादेशी व रोहिंग्या तो नहीं। यह आधार देखने में भी कूट रचित नजर आ रहा है। इसे लेकर भी सवाल उठ रहा है। इसकी गुत्थी पुलिस की जांच के बाद ही सुलझेगी। फिलहाल नूरी बाबा अपने चार अन्य साथियों के साथ सलाखों के पीछे है।
जमील अहमद की जमानत खारिज
श्रावस्ती। नकली नोट के मामले में पुलिस ने नूरी बाबा के साथ बहराइच के पयागपुर थाना क्षेत्र के काशीजोत निवासी जमील अहमद को भी गिरफ्तार किया था। इस मामले में जमील अहमद की ओर से सिविल जज अवर खंड / न्यायिक मजिस्ट्रेट गौरव द्विवेदी के न्यायालय पर जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। इसकी सुनवाई के बाद बुधवार को सिविल जज अवर खंड ने जमानत पत्र खारिज कर दिया है।