फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गर्लफ्रेंड्स के साथ महंगे क्लब में पार्टी के शौकीन लड़के करने लगे गलत काम

Fri, 14 Apr 2017 06:01 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
विज्ञापन
पुल‌िस के हत्थे चढ़े वाहन चोर - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
लखनऊ की मड़ियांव पुलिस ने नए लड़कों के एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो हुक्का बार, लाउंज और क्लबों में पार्टी के लिए पढ़ाई छोड़कर वाहन चोरी कर रहा था। गिरोह के चार बदमाशों को दबोचकर पुलिस ने चोरी की 20 बाइक बरामद की हैं।
विज्ञापन


पकड़े गए बदमाशों में एक नाबालिग है।एएसपी ट्रांस गोमती दुर्गेश कुमार ने बताया कि सीतापुर कोतवाली के तरीनपुर निवासी आकाश सैनी, प्रशांत सिंह और नीलकांत मिश्रा उर्फ आकाश तथा एक नाबालिग को बुधवार रात हरदोई बाईपास पर यादव चौराहा के पास चेकिंग के दौरान दबोचा गया।

चारों अलग-अलग बाइक व स्कूटी से दुबग्गा की तरफ से आ रहे थे। पुलिस ने रुकने का इशारा किया तो चारों भागने लगे। घेराबंदी करके इन्हें पकड़ लिया गया। पकड़े गए बदमाशों ने बताया कि वह अपने महंगे शौक पूरे करने के लिए बाइक चोरी करते हैं।
विज्ञापन


बदमाशों के पास से बरामद दो बाइक मड़ियांव से चोरी की गई थीं जबकि स्कूटी वजीरगंज से उड़ाई गई थी। बदमाशों ने बताया कि उन्हें हुक्का बार, क्लब व लाउंज में पार्टी का शौक था। बदमाशों की कई गर्लफ्रेंड हैं जिन्हें वह हर वीकेंड पर महंगी पार्टियां देते थे।
 

कंप्यूटर से बनाते थे फर्जी कागजात

डेमो - फोटो : अमर उजाला
संडे को गिरोह के चारों बदमाश खुद बियर और हुक्का पार्टी करते थे। गिरोह सीतापुर से लखनऊ आकर वाहन चोरी करता था। इनकी निशानदेही पर पुलिस ने उर्दू-फारसी विश्वविद्यालय के पास सूनसान स्थान पर छिपाकर रखी गई 16 बाइक बरामद की हैं।

यह बाइक बदमाशों ने राजधानी के अलग-अलग स्थानों से चोरी की थीं। एएसपी ट्रांस गोमती ने कहा कि बदमाशों ने सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी में भी वाहन चोरी की कई वारदातें की हैं।

वहां की पुलिस से संपर्क कर सभी का आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। गिरोह को पकड़ने में सीओ अलीगंज विवेक त्रिपाठी, थानाध्यक्ष मड़ियांव अंजनी कुमार पांडेय, उपनिरीक्षक कमलेश्वर प्रसाद यादव, नौशाद अहमद, राजेश कुमार यादव सहित सिपाहियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बदमाशों में नीलकांत मिश्रा उर्फ आकाश ने बीए पास किया है जबकि प्रशांत सिंह ने इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी। बाकी दोनों हाईस्कूल के छात्र थे। चारों कंप्यूटर पर काम करने में माहिर हैं। कंप्यूटर से ही बाइक के फर्जी कागजात तैयार करके सौदा करते थे। वाहन चोरी से हर महीने 25 से 30 हजार रुपये कमाने के चलते चारों ने पढ़ाई छोड़ दी थी।
 
विज्ञापन

स्प्लेंडर थी पहली पसंद

bikes - फोटो : amarujala
बदमाशों ने बताया कि एक बाइक वह पांच से दस हजार रुपये में बेच देते थे। ​ उर्दू-फारसी विश्वविद्यालय के पास खाली प्लॉट में बाइक एक कपड़े से ढककर खड़ी की गई थीं। ग्राहक मिलने पर गिरोह का एक सदस्य शहर के किसी स्थान पर उसे बाइक दिखाता था।

परिवार में आर्थिक संकट अथवा ऐसी ही कोई मजबूरी बताकर बाइक औने-पौने दाम पर बेच दी जाती थी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अब तक गिरोह ने कितनी बाइक बेचीं। बाइक किसने खरीदीं? यह जानकारी भी जुटाई जा रही है।

बदमाशों ने बताया कि स्प्लेंडर बाइक उनकी पहली पसंद थी। भीड़भरे बाजारों में घूमते हुए वह बाइक को निशाना बनाते थे। डुप्लीकेट चाबी से पलक झपकते ही लॉक खोलकर बाइक उड़ा देते थे। स्प्लेंडर बाइक बेचने में दिक्कत नहीं होती थी।

सबसे ज्यादा ग्राहक इसी बाइक के मिलते थे। बदमाशों के पास से बरामद बाइक में लगभग आधी स्प्लेंडर ही हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि गिरोह के पास से बरामद कई बाइक ऐसी हैं जो लावारिस मिली थीं। पुलिस ने इन बाइक को भी चोरों के कब्जे में दिखा दिया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें