डॉ. मनीषा शर्मा
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केजीएमयू की जूनियर रेजीडेंट डॉ. मनीषा शर्मा मामले में वजीरगंज पुलिस व फॉरेंसिक टीम ने बुधवार को उसके परिवारीजनों की मौजूदगी में बुद्घा हॉस्टल स्थित उसके कमरे की जांच की। कमरा नंबर 309 को मनीषा की मौत के बाद सील कर दिया गया था। जिसे उसकी बड़ी बहन दीपा की मौजूदगी में खोला गया।
कमरे की जांच में मनीषा का सुसाइड नोट मिला। जिसमें उसने लिखा था कि अब मैं थक चुकी हूं...दुनिया छोड़ना चाहती हूं। लव यू पापा। उसने सुसाइड नोट में लिखा कि उसकी मौत का जिम्मेदार कोई नहीं है। मनीषा ने रविवार को हाईडोज इंजेक्शन लगाकर खुदकुशी कर ली थी।
पुलिस ने सुसाइड नोट कब्जे में ले लिया है। इसी तरह कमरे में शरीर को शिथिल करने वाले इंजेक्शन के दो वायल मिले हैं। इसके अलावा बेड के नीचे एक सीरिंज भी पाई गई। पुलिस ने मनीषा की नोटबुक भी कब्जे में ले ली है। ताकि हैंडराइटिंग का मिलान किया जा सके।
मामले में प्रभारी निरीक्षक पंकज कुमार ने कहा कि पुलिस ने मनीषा का मोबाइल फोन खंगाला जिसमें डॉ. ऊधम सिंह से चैटिंग में झगड़े की पुष्टि हुई है। दोनों के बीच वाट्सएप ग्रुप पर चैटिंग में काफी नोकझोंक भी हुई थी। प्रभारी निरीक्षक के अनुसार चैटिंग में मनीषा व ऊधम सिंह में करीबी संबंध व झगड़े की बात सामने आई है।
ऊधम सिंह केजीएमयू के यूरो सर्जरी विभाग में सीनियर रेजिडेंट है। मनीषा, 638 शिवनगर, मसवानपुर, कानपुर निवासी रमेश चंद्र विद्यार्थी की सबसे छोटी बेटी है और केजीएमयू के क्वीनमेरी अस्पताल में एमएस की छात्रा थी।
बहन ने की डा. ऊधम सिंह के खिलाफ कार्रवाई और फुटेज की मांग
डा. मनीषा की बहन ने आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए डा. ऊधम सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दीपा का कहना है कि पुलिस व केजीएमयू प्रशासन ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। जबकि उसे अब तक गिरफ्तार कर लिया जाना चाहिए। दीपा के कहने पर ही हॉस्टल के सीसीटीवी फुटेज की भी मांग की गई है।