51 जिंदगियों को लील जाने और कई को अपंग बना देने वाले मलिहाबाद जहरीली शराब कांड की अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व धनंजय शुक्ला की मजिस्ट्रेटी जांच पूरी हो गई है। सूत्रों के मुताबिक इसमें 14 जिम्मेदारों की लापरवाही सामने आई है।
इनमें क्षेत्रीय पुलिस के आठ, आबकारी के चार अधिकारी-कर्मचारियों समेत गांव में तैनात चौकीदार और ग्राम्य पंचायत स्तर का एक कर्मी शामिल है।
जांच में पाया गया कि शराब के अवैध कारोबार की ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी इन सबने कुछ नहीं किया। मौतों की वजह शराब के नाम पर जहरीला मिथाइल अल्कोहल पिलाया जाना रहा। जल्दी ही रिपोर्ट को कार्रवाई की संस्तुति के साथ जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा।
जनवरी में मलिहाबाद के दतली गांव में मौत का तांडव मचा था। पर इस सबके बावजूद आबकारी विभाग की आंतरिक जांच रिपोर्ट में अपनों को बचने की पूरी कोशिश हुई थी।
आबकारी विभाग के नामित जांच अधिकारी ने जनवरी के अंत में सौंपी रिपोर्ट में कई अहम बिंदुओं की अनदेखी की थी। रिपोर्ट में प्लास्टिक इंडस्ट्रीज में उपयोग होने वाले मिथाइल अल्कोहल को जिम्मेदार तो बताया गया पर इसके कारोबार के लिए पूरी जिम्मेदारी क्षेत्रीय पुलिस पर थोप दी थी।
मजिस्ट्रेटी जांच में भी मिथाइल अल्कोहल को ही जिम्मेदार माना गया है लेकिन 14 लोगों को इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार पाया गया है।
खुलेआम बिक रही थी अवैध शराब
सूत्रों के मुताबिक पीड़ितों व तत्कालीन पुलिस व आबकारी विभाग के अफसरों-कर्मचारियों के दर्ज बयान से साफ हुआ कि दतली व आसपास के गांवों में खुलेआम अवैध शराब बनाने व बेचने की जानकारी होने के बावजूद जिम्मेदारों ने न तो सतर्कता बरती और न कोई कार्रवाई की।
अगर तत्कालीन सीओ मलिहाबाद से लेकर थानेदार व हल्के के सिपाही और आबकारी विभाग के निरीक्षक व कर्मी ऐसा करते तो शायद यह हादसा न होता।
दतली गांव के पीड़ितों के बयानों से साफ हुआ है कि जनवरी के पहले सप्ताह से गांव में क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया गया था। 11 जनवरी को फाइनल मुकाबला था। इसमें उन्नाव के एक गांव की टीम का मुकाबला दतली की टीम के साथ था।
क्रिकेट मैच के बाद पिला दिया था मिथाइल अल्कोहल
जगनू व गटरू मैच देखने वालों को खुलेआम कच्ची शराब बेच रहे थे। दतली की टीम के जीतने के बाद गांव के लोग जश्न में डूब गए। अवैध शराब का स्टॉक खत्म हो गया तो जगनू व गटरू ने मिथाइल अल्कोहल लाकर बेचना शुरू कर दिया।
जब तक गांव के बाकी लोग कुछ समझ पाते और प्रशासन तक इस हादसे की जानकारी पहुंचा पाते तब तक हालात बिगड़ गए। पीड़ितों को प्रशासन की तरफ से ट्रामा सेंटर, सिविल और लोहिया अस्पतालों में पहुंचा कर भर्ती कराया गया।
हर संभव स्तर पर बेहतर इलाज मुहैया कराने के बाद भी ज्यादातर को नहीं बचाया जा सका और जो पीड़ित बचे भी उन्हें भी अपंगता झेलनी पड़ रही है।
सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट में शराब के नाम पर जहरीला केमिकल पिलाने के लिए देसी शराब का अवैध कारोबार कर रहे दतली के जगनू व गटरू को सीधे तौर पर जिम्मेदार मान कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। गौरतलब है कि दोनों हादसे के बाद से जेल में हैं और दोनों पर रासुका भी तामील किया जा चुका है।
रोकथाम के लिए हो निगरानी की खास व्यवस्था
भविष्य में ऐसे हादसे न हों इसके लिए रिपोर्ट में ग्राम स्तर पर जागरूकता समिति का गठन कर अवैध शराब के धंधेबाजों पर निगरानी की जरूरत जताई गई है। वहीं सामाजिक तौर पर भी जागरूकता लाने के लिए पंचायत स्तर पर अभियान चलाए जाने की बात कही गई है।
दतली कांड में जिनकी लापरवाही से मौत का तांडव मचा उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई किए जाने की जरूरत बताई गई है। ताकि इसकी नजीर से दूसरे लोगों को सबक लें।
क्षेत्रीय स्तर पर अवैध शराब के धंधे की रोकथाम के लिए नियमित अंतराल पर आबकारी व पुलिस की संयुक्त टीम जांच अभियान चलाएं। इसकी रिपोर्ट संबंधित जिला प्रशासन को दिए जाने की व्यवस्था भी की जाए ।
रिपोर्ट में मलिहाबाद जहरीली शराब कांड में जान गंवाने वालों के परिवारीजनों को दी गई आर्थिक मदद पर संतोष जताया गया है। पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के लिए किए गए कामों को भी सराहा गया है।