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नखलऊवा पंचः शायर जो सीटी बजाकर बंद करा देता था विवि में पढ़ाई

Thu, 28 Mar 2019 01:38 AM IST
ishwar ashish अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला लखनऊ
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अली सरदार जाफरी - फोटो : अमर उजाला
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आजादी की जंग काफी तेज हो चुकी थी। अंग्रेजों का तर्क था कि हिंदुस्तान अभी अपना शासन चलाने की काबिलियत हासिल नहीं कर पाया है। इसलिए हिंदुस्तान का शासन अभी अंग्रेजों के हाथ में रहना ही भारत के लिए ठीक है। पर, आजादी का आंदोलन चलाने वालों का तर्क था कि भारत के लोग अपना शासन-प्रशासन चलाने में सक्षम हैं।
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मशहूर शायर व साहित्यकार अली सरदार जाफरी उन दिनों लखनऊ विवि में एमए कर रहे थे। वह छात्रसंघ के सेक्रेटरी थे और आजादी के आंदोलन में सक्रिय थे। अंग्रेजी हुकूमत की घेराबंदी बढ़ी तो वह हबीबुल्लाह हॉस्टल में मजाज और सिब्ते हसन के पास रहने चले आए।

जाफरी ने लखनऊ की पांच रातें में लिखा है, ‘गोमती किनारे छात्रसंघ भवन था। उसी में मैं बैठा करता था। आजादी के समर्थन में आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी पर पहले विवि में हड़ताल कराई गई। पर, बाद में लगा कि इससे पढ़ाई का नुकसान होता है। इसलिए तय हुआ कि जैसे ही किसी नेता की गिरफ्तारी की खबर मिलेगी वैसे ही सीटी बजवाई जाएगी।
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शायर की गिरफ्तारी के लिए पुलिस वालों को कर दिया सक्रिय

अली सरदार जाफ़री
सीटी बजते ही सभी छात्र पढ़ाई बंद कर कक्षाओं में खड़े हो जाएंगे। पांच मिनट चुपचाप खड़े रहेंगे और फिर पढ़ाई शुरू कर देंगे। पर, अंग्रेजों को शायद इतना भी पसंद नहीं आ रहा था। उन्होंने मेरी गिरफ्तारी के लिए चारों तरफ सीआईडी और पुलिस वालों को सक्रिय कर दिया।

छात्रसंघ भवन के सामने मंकी ब्रिज (अब हनुमान सेतु) पर पुलिस वाले खड़े रहते और मैं उनके सामने यूनियन भवन में बैठकर सीटी बजाता और अंग्रेजों के खिलाफ पढ़ाई बंद करा देता। वह हाथ मलकर रह जाते।’
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