आजादी की जंग काफी तेज हो चुकी थी। अंग्रेजों का तर्क था कि हिंदुस्तान अभी अपना शासन चलाने की काबिलियत हासिल नहीं कर पाया है। इसलिए हिंदुस्तान का शासन अभी अंग्रेजों के हाथ में रहना ही भारत के लिए ठीक है। पर, आजादी का आंदोलन चलाने वालों का तर्क था कि भारत के लोग अपना शासन-प्रशासन चलाने में सक्षम हैं।
मशहूर शायर व साहित्यकार अली सरदार जाफरी उन दिनों लखनऊ विवि में एमए कर रहे थे। वह छात्रसंघ के सेक्रेटरी थे और आजादी के आंदोलन में सक्रिय थे। अंग्रेजी हुकूमत की घेराबंदी बढ़ी तो वह हबीबुल्लाह हॉस्टल में मजाज और सिब्ते हसन के पास रहने चले आए।
जाफरी ने लखनऊ की पांच रातें में लिखा है, ‘गोमती किनारे छात्रसंघ भवन था। उसी में मैं बैठा करता था। आजादी के समर्थन में आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी पर पहले विवि में हड़ताल कराई गई। पर, बाद में लगा कि इससे पढ़ाई का नुकसान होता है। इसलिए तय हुआ कि जैसे ही किसी नेता की गिरफ्तारी की खबर मिलेगी वैसे ही सीटी बजवाई जाएगी।