निमोनिया से बचाव व इलाज संभव है। यदि समय पर इलाज न मिले तो ये बीमारी मौत का कारण भी बन सकती है। संक्रामक रोगों से होने वाली 20 फीसदी मौतें निमोनिया से होती हैं।
विश्व निमोनिया दिवस के मौके पर ये जानकारी केजीएमयू के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के हेड प्रो.सूर्यकांत ने बुधवार को दी।
प्रो.सूर्यकांत ने बताया कि खांसने या छींकने, डायलिसिस के कारण मरीज व अस्पताल में भर्ती मरीजों, दिल के मरीजों जिनके पेसिंग की तारें लगी होती हैं, मुंह एवं ऊपरी पाचन नली के स्रावों के फेफड़ों में चले जाने के कारण निमोनिया हो सकता है।
बताया कि शराब व नशा पीड़ितों, डायलिसिस कराने वाले मरीजों, लंबी हृदय, फेफड़े, लिवर, मधुमेह, कैंसर, एड्स के मरीज को भी निमोनिया हो जाता है।
एंटीबायोटिक्स दवाओं से इलाज किया जाता है। यदि 60 साल के ऊपर की उम्र के व्यक्ति को निमोनिया है तो उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है।
पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के डॉ. वेदप्रकाश ने बताया कि यह बीमारी ठंड के मौसम में ज्यादा होती है। इसलिए ठंड से बचना सबसे जरूरी है।