प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेठी दौरे से कांग्रेस के इस गढ़ में स्मृति ईरानी के लिए चुनावी जमीन तैयार कर गए। उन्होंने अमेठी की जनता को गांधी-नेहरू परिवार की परंपरागत पहचान से पीछा छुड़ाने का संदेश दिया। अमेठी की बदहाली व उपेक्षा के बहाने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को घेरने में कसर नहीं छोड़ी। उन पर वादाखिलाफी और झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए स्मृति की सराहना की। इशारों ही इशारों में यह कहते हुए स्मृति के जीतने का भरोसा जताया कि आने वाले समय में अमेठी का इतिहास बदलने जा रहा है।
2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट पर स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को अच्छी टक्कर दी थी। भाजपा की रणनीति राहुल को उन्हीं के गढ़ में घेरने की है। इसके लिए स्मृति साढ़े चार सालों से अमेठी में न केवल सक्रिय रही हैं बल्कि लोगों से किसी न किसी माध्यम से जुड़ी रही हैं। इस बीच प्रदेश की सियासत में दो बड़े बदलाव हुए हैं। सपा-बसपा का गठबंधन और प्रियंका की सक्रिय राजनीति में एंट्री।
अमेठी सीट पर सपा-बसपा ने कांग्रेस का समर्थन किया है। ऐसे में स्मृति ईरानी ने चुनाव से पहले ही अमेठी में मोदी की सभा कराकर माहौल को अपने पक्ष में करने की कोशिश की है। इस सभा में मोदी का भाषण राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय के बजाय स्थानीय मुद्दों पर ही केंद्रित रहा। उन्होंने एयर स्ट्राइक के बाद पैदा हुए माहौल को कांग्रेस व राहुल के खिलाफ मोड़ने की कोशिश की।
राइफल फैक्ट्री चलाने में देरी, तोपों व राफेल विमान सौदों को लटकाने के लिए उन्होंने राहुल व कांग्रेस की घेराबंदी की। राफेल सौदे में दलाली न मिलने पर उसे ठंडे बस्ते में डालने का आरोप लगाया। उन्होंने साबित करने की कोशिश की कि जिस तरह कांग्रेस सरकारों में देश की सुरक्षा से खिलवाड़ होता है, उसी तरह कांग्रेस अमेठी की भी उपेक्षा करती है।
कई स्थानीय उदाहरणों से लोगों को समझाने की कोशिश की कि अब राहुल-सोनिया के प्रभाव से मुक्त होने का वक्त आ गया है। इसीलिए कहा कि अमेठी की पहचान गांधी-नेहरू के बजाय एके-203 राइफल से होगी।