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जब राजनारायण के बदले कैप्टन साहब ने खाई डॉ. लोहिया से डांट, पढ़ें- एक मजेदार वाक्या

Mon, 04 Mar 2019 05:11 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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नखलऊवा पंच में हम ऐसी महान विभूतियों के संस्मरण शामिल करते हैं जिन्होंने देश व समाज पर गहरी छाप छोड़ी। पढ़ें, एक मजेदार वाक्या...

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बात 1967 की है। कैप्टन अब्बास अली संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रदेश महामंत्री थे। उत्तर प्रदेश में राज्य कर्मचारियों की हड़ताल चल रही थी। राजनारायण ने 18 जनवरी को कैप्टन साहब के नाम से बयान जारी कर दिया कि हड़ताल को देखते हुए राज्य सरकार फरवरी में प्रस्तावित आम चुनाव को उस वक्त तक के लिए स्थगित करा दे जब तक कर्मचारी काम पर लौट न आएं।

यह खबर अखबारों ने प्रमुखता से छापा। हड़कंप मच गया। कैप्टन साहब की समझ में नहीं आ रहा था कि ये क्या हो गया। डॉ. राममनोहर लोहिया 21 जनवरी को लखनऊ आ रहे थे। उनका लखनऊ, बाराबंकी, बस्ती, गोरखपुर सहित कई जिलों का दौरा था।
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न रहूं किसी का दस्तनिगर में कैप्टन अब्बास अली ने लिखा है, ‘सुबह सात बजे मैं चारबाग स्टेशन डॉ. लोहिया को लेने पहुंचा। मैं उनका स्वागत करने बढ़ा ही था कि वह बेहद नाराजगी में बोले, ‘तुमने ऐन चुनाव के वक्त इस तरह का गलत बयान क्यों दे दिया?

जानते हो, तुम्हारे इस बयान की आड़ लेकर अगर सरकार ने फरवरी में चुनाव मुल्तवी कराने की चाल चल दी तो क्या होगा?’

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'नहीं बता रहा हूं तो खुद सुन रहा हूं'

डॉक्टर साहब बोल रहे थे और मैं सोच रहा था कि सत्य बता दूं तो राजनारायण को डांट पड़ेगी, नहीं बता रहा हूं तो खुद सुन रहा हूं। मैं डॉ. साहब के साथ बाराबंकी पहुंचा। वहां उन्हें रामसेवक यादव का चुनाव प्रचार करना था। डॉक्टर साहब ने यादव जी से मेरे बयान का जिक्र किया।

यादव जी ने सच्चाई बताई तो डॉक्टर साहब ने मुझसे कहा, ‘बेकार में तुम्हें डांट दिया। बताना चाहिए था। अपने नाम से किसी को बयान न देने दो, भले ही वह वरिष्ठ नेता ही क्यों न हो।’
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