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जानें ऐशबाग रामलीला की खासियत जिसे देखने दिल्ली से आ रहे हैं मोदी

Sun, 09 Oct 2016 01:48 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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रामलीला - फोटो : amar ujala
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दशहरे पर लखनऊ आ रहे हैं। वह यहां ऐशबाग की रामलीला भी देखेंगे। इस रामलीला का इतिहास 600 साल पुराना है। ऐशबाग रामलीला से जुड़े कई प्रसंग हैं। समित‌ि के संयोजक पंडित आदित्य द्विवेदी के मुताबिक करीब 60 साल पहले जटायु का किरदार निभाने वाले सूरजबली अपने किरदार में इतना रम गए कि वह आग लगने पर भी मंच पर डटे रहे और उनकी जान चली गई। आज भी रामलीला शुरू होने से पहले उनको नमन किया जाता है।
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रामलीला - फोटो : amar ujala
ऐशबाग रामलीला गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है। नवाब आसिफउद्दौला ने इसके मंचन से खुश होकर रामलीला के लिए साढ़े छह एकड़ जमीन दी थी। वहीं रामलीला मैदान के सामने ईदगाह है और रामलीला की तैयारी में हिंदू-मुस्लिम कारीगर मिलकर काम करते हैं। रावण का पुतला बनाने वाले कारीगर मुन्ना भी मुस्लिम हैं। 
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रामलीला - फोटो : amar ujala
रामचरितमानस लिखने के बाद गोस्वामी तुलसीदास पूरे अवध क्षेत्र में घूम-घूमकर रामायण का पाठ करते थे। लखनऊ में वह छांछी कुंआ मंदिर या फिर ऐशबाग अखाड़े(अब रामलीला मैदान) में रुकते थे। 

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रामलीला - फोटो : amar ujala
अखाड़े में साधुओं का समागम आम बात थी। एक बार तुलसीदास ने अखाड़े में रामलीला के मंचन के बारे में सोचा। जबकि वह बनारस के रामनगर में रामलीला शुरू करवा चुके थे। साधुओं को यह बात पता चली तो उन्होंने साधुओं ने लंगोट कसे और मंच पर राम की लीलाओं को बेहतरीन ढंग से उतार दिया। जिसे काफी पसंद किया गया, इसके बाद यह पहल चल निकली। नवाब आसिफउद्दौला रामलीला देखने आया करते थे, उन्होंने जब मंचन देखा तो खुश हो गए और रामलीला के लिए साढ़े छह एकड़ जमीन दे दी...।
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रामलीला - फोटो : amar ujala
छह सौ साल पहले कुछ इसी तरह शुरू हुआ था, ऐशबाग रामलीला का कारवां। जो आज देश की सबसे पुरानी रामलीलाओं में अपनी पहचान बना चुकी है। श्रीरामलीला समिति ऐशबाग के मंत्री आदित्य द्विवेदी बताते हैं कि ऐसा सुनने को मिलता है कि पहली रामलीला में साधुओं ने जिस अभिनय का परिचय दिया था, लोग उसके कायल हो गए।
 
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रामलीला - फोटो : amar ujala
यही कारण है कि यहां रामलीला देखने के लिए लखनऊ ही नहीं आसपास के जिलों से भी लोग आते थे। वह बताते हैं कि यहां की सबसे बड़ी खासियत यह भी है कि रामलीला प्रतिवर्ष कुछ नयापन लेकर आती है। जिसे सराहा जाता है। 
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रामलीला - फोटो : amar ujala
समिति के मंत्री बताते हैं कि एक वह भी दौर था जब ऐशबाग रामलीला को देखने के लिए तगड़ी लाइन लगती थी। दर्शक पास पाने के लिए घण्टों कड़ी धूप में पसीना बहाते नजर आते थे। हालांकि, अब दर्शकों की संख्या पहले से घटी है। लेकिन रामलीला देखने आने वालों के लिए प्रतिवर्ष प्रतियोगिताएं व मनोरंजक कार्यक्रम कराए जाते हैं।

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रामलीला - फोटो : amar ujala
रामलीला कमेटी के मुताबिक यहां पहले अयोध्या के संत आकर रामलीला करवाते थे। 1860 में रामलीला समिति बनी। ढाई सौ से ज्यादा कलाकार रामलीला में अभिनय करते हैं जिसमें 60 नामी कलाकार देश के दूसरे शहरों से यहां रामलीला में अभिनय करने आते हैं।

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रामलीला - फोटो : amar ujala
रामलीला कमेटी के मुताबिक यहां पहले अयोध्या के संत आकर रामलीला करवाते थे। 1860 में रामलीला समिति बनी। ढाई सौ से ज्यादा कलाकार रामलीला में अभिनय करते हैं जिसमें 60 नामी कलाकार देश के दूसरे शहरों से यहां रामलीला में अभिनय करने आते हैं।
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रामलीला - फोटो : amar ujala
इस बार पीएम के आने पर मंच पर कम से कम लोगों के बैठने की व्यवस्था रहेगी। बाकी वीवीआईपी व अन्य आमंत्रित अतिथियों के लिए अलग कुर्सियां लगा कर बैठने की व्यवस्था की जाएगी। इसके चलते हर साल शहर के इस प्रमुख रावण दहन कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में जुटने वाले शहरवासियों को मायूसी भी भुगतनी पड़ेगी।
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