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सबसे कठिन मैदान से मोदी का जंग का एलान, विकास का हथियार, सहारा बने सरोकार

Mon, 17 Dec 2018 03:36 AM IST
vivek shukla अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
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रायबरेली में प्रधानमंत्री मोदी
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लोकसभा चुनाव का औपचारिक प्रचार शुरू होने में भले ही अभी वक्त हो। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी के क्षेत्र और तीर्थराज प्रयाग से एक तरह से चुनावी जंग का एलान कर दिया। वजह शायद मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की जीत थी।

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यूपी के अपने इस दौरे में उन्होंने कांग्रेस को ही मुख्य रूप से निशाने पर रखकर यह संदेश दे दिया कि भाजपा दबाव में नहीं है। इसीलिए उन्होंने प्रयागराज जाने के साथ सियासी जंग के लिहाज से सबसे कठिन रायबरेली के मैदान को चुना। जहां भाजपा 2014 की लहर में सोनिया के खिलाफ लड़ाई को कांटे का भी नहीं बना पाई थी।

रायबरेली में विकास के हथियार से उन्होंने इस काम को शुरू किया तो प्रयागराज में सरोकारों और कांग्रेस की तरफ से संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादाओं पर हो रही चोट के उल्लेख के साथ इसे आगे बढ़ाया।
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प्रतीकों के तीर से विरोधियों पर निशाना साधने में माहिर मोदी ने रायबरेली में रामचरित मानस की चौपाइयों से कांगेस पर वार किया तो प्रयागराज में भी ‘कोउ कहि सके प्रयाग प्रभाऊ’ का उल्लेख कर वह इसी राह पर आगे बढ़े।

संगम तट पर गंगा पूजा और आरती के बाद पास ही स्थित किले में मौजूद ‘अक्षय वट’ का दर्शन कर उसे पहली बार आम लोगों के दर्शनों के लिए खोलकर उन्होंने कुंभ व हिंदुत्व के सहारे सियासी समीकरणों को भी दुरुस्त करने की कोशिश की।

प्रयागराज की सभा के अंत में ‘जय गंगामैया, जय सरस्वती मैया, जय तीर्थराज और भारत माता की जय’ के घोष के साथ भाषण को खत्म करते हुए उन्होंने साफ कर दिया कि उनका एजेंडा कांग्रेस पर वार के साथ हिंदुत्व है।

इस तरह साधा निशाना

जिस तरह पांच राज्यों के चुनावी नतीजे आने के पहले ही पीएम का रायबरेली और प्रयागराज दौरा तय हो चुका था। इससे यह साफ है कि मोदी ने पहले ही तय कर लिया था कि उन्हें इस बार लोकसभा चुनाव का मोर्चा कांग्रेस से ही सजाना है। इसीलिए उन्होंने कांग्रेस को ललकारने के लिए इस पार्टी के शीर्ष नेता के गढ़ को चुना। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मोदी जानते हैं कि विरोधियों के संभलने से पहले ही उन पर आक्रमण कर देना बेहतर रणनीति होती है।

कांग्रेस के लोग अभी मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की जीत के जश्न में ही डूबे हैं। ऐसे में मोदी ने सोनिया गांधी के क्षेत्र से कांग्रेस पर हमला बोल दिया। उन्होंने यह कहते हुए कि रायबरेली में रेल कोच फैक्ट्री तैयार तो 2010 में हो गई थी। लेकिन यहां कोच बनना तब शुरू हुए जब भाजपा सरकार केंद्र में आ गई। एक तरह से यह समझाने की कोशिश की कि कांग्रेस किसी को जल्दी कुछ देना नहीं चाहती जबकि भाजपा बिना भेदभाव काम करती है। इसीलिए उन्होंने रामायण की चौपाई ‘झूठहिं लेना, झूठहिं देना, झूठहिं भोजन, झूठ चबेना’ का उल्लेख करते हुए लोगों के दिमाग में यह भी बैठाया कांग्रेस सिर्फ झूठे आश्वासन देकर लोगों को भरमाती है।

रायबरेली व प्रयागराज को यूं ही नहीं चुना 

रायबरेली और फिर प्रयागराज। एक कांग्रेस की शीर्ष नेता स्व. इंदिरागांधी और अब सोनिया गांधी का चुनावी क्षेत्र तो दूसरा प्रयागराज जहां नेहरू परिवार का पैतृक घर। जो शहर न सिर्फ देश की स्वाधीनता आंदोलन और बडे़े राजनेताओं की गतिविधियों का गवाह रहा, बल्कि इसी शहर के एक हिस्से फूलपुर ने जवाहरलाल नेहरू को पहली बार सांसद चुनकर भेजा था। इस लिहाज से रायबरेली व प्रयागराज कांग्रेस की जड़ लासे शहर हैं। इसीलिए रायबरेली से प्रयागराज पहुंचे मोदी ने यहां एक पंथ दो काज किए।

इसी शहर में स्थित उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश ने गांधी-नेहरू परिवार की प्रतिनिधि और लगभग ढाई दशक तक देश की सबसे ताकतवर नेता मानी जाने वाली इंदिरागांधी के चुनाव को रद्द करते हुए उनके खिलाफ फैसला दिया था। इसके बाद देश में आपातकाल लगा था। मोदी ने इस घटना को प्रतीक बनाया और इंदिरागांधी का नाम लिए बगैर न्यायपालिका सहित अन्य संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा पर चोट करने का कांग्रेस पर आरोप लगाया।
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प्रयागराज एक पंथ दो काज

संकेतों में सही मोदी ने श्रीराम जन्मभूमि मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कर रहे न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग लाने के मामले की तरफ  इशारा करते हुए कहा कि न्यायपालिका पर दबाव बनाना कांग्रेस की प्रवृत्ति है। पहले संगम पर पूरी श्रद्धा से पूजा-अर्चना और फिर सभी 13 अखाड़ों के प्रमुखों को प्रणाम कर मोदी ने हिंदुत्व के सांस्कृतिक सरोकारों में अगाध आस्था का संदेश दिया तो सभा में कुंभ के माहात्म्य का उल्लेख कर 4800 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की शुरुआत करके पीएम ने यह भी साफ करने की कोशिश की कि ‘सबका साथ-सबका विकास ’ के संकल्प के साथ हिंदुत्व के सांस्कृतिक सरोकारों को लेकर उनकी निष्ठा को न तो कोई संकोच है और न वह डगमगाने वाली है। सभा के बीच उन्होंने खुद को यूपी वाला बताते हुए जहां खुद को कुंभ आयोजन का मेजबान करार दिया तो एक प्रसंग में काशी का उल्लेख करते यह भी साफ किया कि इस बार भी वह लोकसभा का चुनाव यूपी से ही लड़ेंगे।
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