सभा में सतांव के बरदर से आए किसान भोला प्रसाद ने कहा कि गांव के लोगों के साथ आए हैं। उन्हें उम्मीद थी कि किसानों के लिए बड़ी घोषणा होगी, लेकिन मायूसी हाथ लगी। भोला ने छुट्टा जानवरों को किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि फसलें बर्बाद हो रही हैं। सरकार को छुट्टा जानवरों से फसलों को हो रहे नुकसान की भरपाई करनी चाहिए। इन पर अंकुश के लिए सरकार को कुछ करना चाहिए।
भाजपा ने कुछ नया नहीं किया
सभा में रायबरेली के व्यापारी राम सजीवन गुप्ता का कहना था कि कांग्रेस ने जो काम शुरू किए थे, भाजपा वही आगे बढ़ा रही है। कुछ नया नहीं किया है। नोटबंदी का असर व्यापार पर जरूर पड़ा है। इसका सबसे ज्यादा असर कारोबारियों पर पड़ा।
गुरबख्शगंज के रहने वाले पंकज सिंह बी टेक करने के बाद बेरोजगार हैं। उनका कहना था कि भले ही यहां फैक्ट्री खुल गई हो, लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, लालगंज की निर्मला देवी भी सभा में ये उम्मीद लेकर पहुंची थीं कि कोई नेता या अफसर मिल जाए तो उसे अपनी व्यथा सुना दें लेकिन मायूसी हाथ लगी। उनका कहना था कि तीन लड़के व पांच बेटियां हैं। पति की 2006 में मृत्यु हो गई। फैक्ट्री लगी थी तो उम्मीद थी कि किसी लड़के को नौकरी मिल जाएगी, लेकिन तीनोें बेटे बेरोजगार हैं। ठेला लगाकर खर्च चलता है। बेटियों के विवाह के लिए पैसा नहीं है। नेता आते हैं, भाषण देकर चले जाते हैं। हमें कुछ नहीं मिलता। प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के विद्यालय की छात्राएं भी सभा में पहुंची। पूछने पर कहा कि छुट्टी थी, विद्यालय से कहा गया था इसलिए आए हैं। वोट देने के सवाल पर कहती हैं कि चुनाव आएगा तो देखेंगे। जो ठीक लगेगा उसी को वोट देंगे।