लोकसभा चुनाव के दौरान 56 इंच सीने के जुमले से मुलायमसिंह यादव पर हमला करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राय शुक्रवार को बदली नजर आई। मोदी के मुलायम रुख का अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि सपा सुप्रीमो अब उनके लिए लोकतंत्र को प्रतिबद्ध आदरणीय नेता हैं।
प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को सहारनपुर के सरूरपुर गांव में आयोजित जनसभा में बोल रहे थे। संसद के गतिरोध को तोड़ने केलिए कांग्रेस से अलग होने पर सपा सुप्रीमो की तारीफ करते हुए मोदी ने कहा, ‘आदरणीय मुलायम सिंह यादव हमारे विरोधी हैं, मोदी के विरोध का कोई मौका नहीं छोड़ते....कठोर-कठोर बात कहते हैं....मगर संसद चलाने के लिए उन्होंने रात-रात तक हरसंभव कोशिश की।’
मोदी ने कहा कि मुलायमसिंह को लोकतंत्र और संसद की गरिमा का पता है। वह हमारे विरोधी हैं, लेकिन संसद का वह भी सम्मान करते हैं। यही लोकतंत्र की खासियत है। लेकिन, कांग्रेस लोकतंत्र को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। यदि उन्हें जनता का विश्वास जीतना है तो नकारात्मक राजनीति छोड़नी होगी।
गुस्से में मां-बेटे :
मोदी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर जमकर शब्द बाण चलाए। दोनों का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, मां को गुस्सा इसलिए आता है कि बेटा रह गया और बेटा इसलिए गुस्से में है कि पढ़ा-लिखा, अंग्रेजीदां होने के बावजूद उसकी जगह चाय वाले का बेटा दिल्ली की गद्दी पर जा बैठा।
...लेकिन 20 महीने पहले तो यह कहा था
नरेन्द्र मोदी गोरखपुर 23 जनवरी 2014
--‘नेता जी! गुजरात के मायने भी जानते हैं.... नेताजी! आप सच कहते हैं। आप उत्तर प्रदेश को गुजरात नहीं बना सकते। गुजरात बनाने के लिए 56 इंच का सीना चाहिए। आपमें गुजरात बनाने की हैसियत ही कहां।
--न विकास न अमन चैन, न रोजगार न बेटियों की इज्जत। इतने बड़े यूपी को अपनी राजनीति के लिए बर्बाद करने का संकल्प ले रखा है आपने। यदि यूपी गुजरात बन जाए तो यह अकेले पूरे देश को पाल सकता है।
2 मार्च 2014, लखनऊ में
-- ‘नेताजी! देश अब गुंडागर्दी की राजनीति स्वीकार नहीं करेगा। आपके कारनामे कैसे हैं, इसके बारे में बताने की जरूरत नहीं है। मेहरबानी करके डॉ. राममनोहर लोहिया का नाम बदनाम न करिये।’
ये सियासी लेनदेन है...
पीएम मोदी की तारीफ को जानकार सियासी लेनदेन मानते हैं। हालांकि संसद-सत्र के दौरान भी उन्होंने मुलायम की तारीफ की थी, लेकिन उसी शाम को सपा सुप्रीमो कांग्रेस के साथ खड़े नजर आए थे।
- मोदी का मुलायम प्रेम राज्यसभा के गणित से जुड़ा है, जहां भाजपा का बहुमत नहीं है। वहां सपा की मदद केंद्र सरकार की राह आसान करेगी।
- अब साफ हो गया कि यादवसिंह की सीबीआई जांच सपा सुप्रीमो को नरम करने में सहायक हुआ है।
- इसी पृष्ठभूमि में मुलायम-रामगोपाल यादव की मोदी से मुलाकात हुई और अगले दिन सपा बिहार के महागठबंधन से अलग हो गई।