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प्रधानमंत्री मोदी ने साढ़े तीन साल में 28 बैठकें कर यूपी में वर्षों से लंबित 197 काम कराए पूरे

Mon, 01 Oct 2018 04:58 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साढ़े तीन साल में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव के साथ 28 बैठकें कर वर्षों पुराने 197 प्रोजेक्ट पूरे करा दिए। 98 पर प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार काम चल रहा है।

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शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में परियोजनाएं वर्षों से लंबित थीं। इनमें से कई तो दशकों से लंबित थीं। शिलान्यास हो गए, काम नहीं हुआ। घोषणा हो गई, पैसा आवंटित नहीं हो सका। इनमें से कई योजनाओं, परियोजनाओं व कार्यक्रमों को केंद्र ने फ्लैगशिप कार्यक्रम के रूप में आगे बढ़ाया है।

पीएम मोदी ऐसे चुनिंदा लंबित मुद्दों पर राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ नियमित रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर बैठकें कर रहे हैं। इस बैठक को ‘प्रगति’ नाम दिया गया है। प्रधानमंत्री के समक्ष लाए जाने वाले सभी मामलों में प्राप्त उपलब्धि वेबपोर्टल ‘प्रगति’ पर अपलोड की जाती है।
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अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने 25 मार्च 2015 से 29 अगस्त 2018 के बीच राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ रिकॉर्ड 28 बैठकें की हैं। इनमें यूपी से जुड़े 295 मुद्दों के समाधान के संबंध में प्रधानमंत्री ने दिशा-निर्देश दिए।

सर्वोच्च स्तर से मॉनिटरिंग का असर ये हुआ कि 295 मुद्दों में से 197 मामलों का पूरी तरह समाधान हो चुका है। इनमें पुल, रेलवे, राजमार्ग, मेट्रो, औद्योगिक विकास आदि से जुड़ी वर्षों पुरानी कई परियोजनाएं तेजी से पूरी हुई हैं। 98 योजनाओं, परियोजनाओं व कार्यक्रमों में आंशिक प्रगति हो पाई है। इन्हें जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास चल रहा है।

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...कई विभाग पीएम स्तर की मॉनिटरिंग से भी बेफिक्र

प्रधानमंत्री के निर्देशों पर अमल की मुख्य सचिव के स्तर पर नियमित समीक्षा होती है। सितंबर की समीक्षा में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। राजमार्ग निर्माण से जुड़े कई मामलों में लंबे अर्से से राजस्व विभाग और एनएचएआई अलग-अलग तथ्य दे रहे हैं। अफसरों ने इन्हें एक साथ बैठाकर इस पर चर्चा की जरूरत नहीं समझी।

सात सितंबर की बैठक में मुख्य सचिव ने राजस्व विभाग को एनएचएआई के अफसरों के साथ बैठक कर तथ्यात्मक रिपोर्ट रखने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री प्रदेश में शिशु मृत्यु दर की भी नियमित समीक्षा करते हैं।

खुलासा हुआ कि मई 2016 से इससे जुड़ी सूचनाएं ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने उपलब्ध नहीं कराईं। मुख्य सचिव ने नियमित अपडेटेड सूचना उपलब्ध कराने को कहा है।
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