इसका असर सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) पर भी पड़ रहा है। इस योजना में आवास विकास परिषद व विकास प्राधिकरणों को 1,32,493 मकान बनाने का लक्ष्य दिया गया था। इन मकानों की कीमत छह लाख रुपये है, जिसमें डेढ़ लाख केंद्र और एक लाख रुपये राज्य सरकार अनुदान के रूप में देती है। इसके बाद भी ये मकान नहीं बन पा रहे हैं। पिछले दिनों प्रमुख सचिव आवास नितिन रमेश गोकर्ण ने इस योजना की प्रगति रिपोर्ट मांगी थी। इसमें पता चला कि जमीन की कमी की वजह से लक्ष्य के अनुरूप मकान नहीं बन पा रहे हैं। ताजी रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ वाराणसी विकास प्राधिकरण अपने तय लक्ष्य 858 मकान को पूरा कर रहा है।
इन प्राधिकरणों ने लौटाए प्रस्ताव
आगरा 856, अलीगढ़ 8064, अयोध्या 256, बरेली 1026, बांदा 752, गाजियाबाद 8,628, गोरखपुर 1536, हापुड़-पिलखुआ 1500, झांसी 1248, कानपुर 17000, लखनऊ 4456, मेरठ 2320, मुरादाबाद 3104 और रायबरेली विकास प्राधिकरण ने 457 मकानों के प्रस्ताव वापस लौटाए हैं।