जीवन में की गईं गलतियां आने वाली पीढ़ियां न करें, यह चिंता अमूमन हर बुजुर्ग को रहती है।
इसके लिए वे तमाम तरह के प्रयास भी करते हैं। गुरुवार को बन्ने मियां और नवाब मुन्ने मियां भी इसी अंतर्द्वंद व कश्मकश से जूझते नजर आए।
जब वे कारोबार के सिलसिले में विदेश गए तो बेटों की देखभाल के लिए एक साथी छोड़ जाते हैं, जो अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में नाकाम साबित होते हैं।
बन्ने मियां व मुन्ने मियां का यह द्वंद राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में मंचित नाटक ‘बिच्छू’ में उभरकर सामने आया, जिसे मून आर्ट्स एण्ड मोशन पिक्चर्स की ओर से मंचित किया गया। मौलियर लिखित नाटक का निर्देशन शराफत खान ने किया।
मंच पर नील कौशिक, कासिम काजिम, मोहम्मद इरफान, शिवेंद्र, अंजली, अमित, शमीम, नियाज, कुमार रोहित, मो. हलीम, मुन्ना खान, माहिर मिर्जा और सरिता गुप्प्त ने अभिनय किया।