‘यदि हम अपनी बेटी का कल सुरक्षित रखना चाहते हैं तो दूसरे की
बेटी को अपनी बेटी समझ कर उसके हक के लिए क्यों न आज ही लड़ा जाए’, लेकिन
इसके लिए बेटियों को भी मजबूत होना पड़ेगा।
बिटिया के लिए सुरक्षित माहौल
बनाने और उसमें साकार होने वाली एक सरकारी व्यवस्था को आधार बनाकर मंच पर
उतरी गाथा ने दर्शकों को झकझोरा।
कैसरबाग के राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह
में चल रहे दृश्य भारती नाट्य समारोह के दूसरे दिन बुधवार को नाटक ‘चुप्पी
तोड़, खुलकर बोल :1090’ का मंचन हुआ।
निर्देशन युवा रंगकर्मी मुकेश वर्मा
ने किया। सवा घंटे से अधिक के मंचन में कहानी दिखाती है कि कैसे एक सत्य
घटना सरकारी सोच को बदलने का काम करती है।
जब छेड़छाड़ की पीड़ित एक युवती
थाने में जाती है, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं होती। फिर इसके बाद साकार होती
है 1090 की व्यवस्था।
मंचन के दौरान मंच पर सीएम अखिलेश के किरदार में रवि
जंचे तो अजय द्विवेदी भी सराहे गए।