लखनऊ। औद्योगिक कचरे, खनन और रासायनिक अपशिष्टों से दूषित हो रही मिट्टी को साफ करने में अब पौधे और बायोचार मददगार साबित हो सकते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने इस तकनीक की संभावनाओं पर शोध किया है। उनका शोध अध्याय अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक एल्सेवियर की पुस्तक में प्रकाशित हुआ है।
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यह शोध वनस्पति विज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डॉ. नेहा साहू और शोधार्थियों तृप्ति माथुर, अनुराग सिंह व नेहा यादव ने तैयार किया है। इसमें कृषि अवशेषों के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण और दूषित भूमि के पुनर्वास की संभावनाएं भी बताई गई हैं। बायोचार-असिस्टेड फाइटोरिमेडिएशन ऑफ इनऑर्गेनिक कंटामिनेंट्स शीर्षक वाले इस अध्याय में बताया गया है कि कृषि अवशेषों से तैयार बायोचार और विशेष पौधों के संयुक्त इस्तेमाल से मिट्टी में मौजूद सीसा, कैडमियम और क्रोमियम जैसे जहरीले तत्वों का असर कम किया जा सकता है। बायोचार मिट्टी में इन तत्वों को बांधकर पौधों और पानी तक उनकी पहुंच सीमित करने में मदद करता है। इससे भूजल और खाद्य फसलों के दूषित होने का खतरा घट सकता है। साथ ही मिट्टी की जल धारण क्षमता और उपजाऊपन में भी सुधार की संभावना है।