माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) में बुधवार से दो दिवसीय ग्रीष्मकालीन पादप विज्ञान महोत्सव 2026 की शुरुआत हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि- वैज्ञानिक एवं नवाचार अनुसंधान अकादमी गाजियाबाद के निदेशक प्रो. मनोज कुमार धर ने कहा कि शोध और जिज्ञासा ही सत्य तक पहुंचने के सबसे अहम रास्ते हैं। उन्होंने सरल भाषा में समझाया कि पौधे भले ही बोलते नहीं हैं, लेकिन वे जीवित होते हैं और अपने आसपास के बदलावों पर प्रतिक्रिया देते हैं।
उन्होंने केसर की खासियत पर भी प्रकाश डाला। बताया कि इसकी खेती मेहनत भरी होती है, इसलिए यह महंगा होता है। केसर में औषधीय गुण भी होते हैं और इसकी खुशबू, रंग व स्वाद के पीछे वैज्ञानिक कारण होते हैं। कश्मीर में इसकी खेती और उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों की भी जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में अयोध्या के गुरुकुल के विद्यार्थियों ने वैदिक मंत्रोच्चार कर वातावरण को पारंपरिक रंग दिया। एनबीआरआई के निदेशक डॉ. अजीत कुमार शासनी ने कहा कि इस महोत्सव का उद्देश्य छात्रों और शोधार्थियों की प्रतिभा को निखारना है।
समन्वयक डॉ. पूनम सिंह ने बताया कि महोत्सव में भाषण, पोस्टर, प्रश्नोत्तरी, चित्रकला, फोटोग्राफी और ट्रेजर हंट जैसी गतिविधियां होंगी। इसमें करीब 200 शोधार्थी भाग ले रहे हैं।