प्रदेश को बायो-टेक्नोलॉजी का हब बनाने के लिए सरकार इसकी नीति में व्यापक फेरबदल करने जा रही है।
नीति का मसौदा लगभग तैयार हो गया है। नई नीति में ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रोजगार देने पर जोर दिया जा रहा है।
इसमें बायो-टेक्नोलॉजी की नई विधाओं स्वास्थ्य, कृषि व पर्यावरण सेक्टर पर ज्यादा फोकस किया गया है।
बायो-टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में पूरे विश्व में खूब तरक्की हुई है। अपने देश में भी महाराष्ट्र के साथ ही दक्षिण के कई राज्य इसमें काफी अच्छा काम कर रहे हैं।
बंगलूरू, मुंबई, पुणे व हैदराबाद जैसे शहरों ने इस क्षेत्र में अपने झंडे बुलंद किये हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश काफी पिछड़ा हुआ है। इस क्षेत्र की महत्ता को समझते हुए हुए सरकार अब यूपी को बायो-टेक्नोलॉजी का हब बनाने की तैयारी कर रही है।
इसके लिए सबसे जरूरी नीति में बदलाव किये जा रहे हैं। अंतिम रूप देने के बाद नीति कैबिनेट की बैठक में लायी जाएगी।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग इस बार ऐसी नीति तैयार कर रहा है ताकि इस क्षेत्र के उद्योग प्रदेश में आकर यहां अपनी इकाईयां लगा सकें। उन्हें कई तरह की रियायतें देने की योजना है।
प्रदेश में लगने वाले उद्योगों के उत्पाद को भी प्रदेश सरकार खरीदने पर विचार कर रही है। इसके लिए एक उच्च स्तरीय समिति भी बनाने का प्रस्ताव है। यह समिति तय करेगी कि उत्पादों को किस प्रकार बढ़ावा दिया जाए।
बायो-टेक्नोलॉजी ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भी खूब प्रगति की है। देश के कई हिस्सों में अब जेनेटिक टेस्टिंग होने लगी है।
डीएनए पर आधारित इस जांच में यह पता चल जाता है कि भविष्य में कौन सी बीमारी होने की आशंका है। इस तरह जांच करने वाली प्रयोगशालाएं प्रदेश में आएं इसके भी प्रयास नई नीति में किये जा रहे हैं।