20 साल पहले चार दोस्तों ने मिलकर एक सपना देखा। आर्ट्स कॉलेज में मास्टर्स डिग्री का कोर्स शुरू करवाने का क्योंकि यहां से निकलने वाले ग्रेजुएट अक्सर दिल्ली और देश के दूसरे आर्ट कॉलेजों में एडमिशन नहीं पा पाते थे।
तमाम ज्ञापन सौंपे गए और सैकड़ों प्रदर्शन हुए लेकिन बात नहीं बनी। फिर प्लेन हाईजैक करने की योजना बनाई गई।
नकली बंदूकें तैयार की गईं और लखनऊ से दिल्ली जा रही फ्लाइट (आईसी-436) को हाईजैक कर लिया। देशभर में हड़कंप मच गया। सरकारें हिल गईं।
मौके पर पहुंचे राज्यपाल और आला अधिकारियों को उन्होंने अपनी मांग बताई। आश्वासन मिला तो रास्ते (फर्रुखाबाद) से प्लेन वापस अमौसी एयरपोर्ट ले आए और समर्पण कर दिया। दो साल की जेल हुई और कॅरिअर लगभग बर्बाद हो गया।
आर्ट्स कॉलेज के छात्र गिरीश तिवारी (लखनऊ), सोमेंद्र इक्का (अंडमान-निकोबार) और गोपाल पंचरतन (बिहार) और आनंद कुमार (बिहार) ही वे चार दोस्त हैं जिन्होंने 1993 में प्लेन हाईजैक कर कॉलेज में मास्टर्स इन परफॉर्मिंग आर्ट्स (एमएफए) शुरू करवाया।
अब इसका नाम मास्टर्स इन विजुअल आर्ट्स (एमवीए) कर दिया गया है और बदहाली का शिकार होकर इसका मूर्तिकला का कोर्स बंद होने की कगार पर पहुंच गया है।
मूर्तिकला कोर्स में प्रतिवर्ष छात्रों की संख्या घट रही है। इस वर्ष मूर्तिकला में कुल छह एडमिशन ही हुए हैं जबकि इसमें कुल बीस सीटें हैं। छात्र महंगी फीस और सुविधाओं की कमी को इसकी वजह बताते हैं।
वे बताते हैं कि 70 हजार रुपये फीस है। इसके अलावा डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा जयपुर से पत्थर मंगाने पर खर्च करने पड़ते हैं। शिक्षक पढ़ाने नहीं आते, सो अलग।
दूसरी ओर अधिकारी छात्रों के मूर्तिकला के प्रति घटते रुझान को इसकी वजह बताते हैं। उनके अनुसार छात्रों की प्राथमिकता कॉमर्शियल आर्ट और पेंटिंग होती है न कि मूर्तिकला। कॉमर्शियल आर्ट की 20 सीटें पूरी भरी हुई हैं और पेंटिंग की 40 सीटों में 36 छात्र एडमिशन लेकर पढ़ रहे हैं।
मूर्तिकला के छात्रों का खर्च
1.6 लाख पत्थर मंगाने पर
70 हजार रुपये फीस
15 हजार रुपये हॉस्टल खर्च
16 हजार रुपये लगभग मेस चार्ज
4200 रुपये केमिकल (रेजिन) पर
200 रुपये लाइब्रेरी चार्ज
(नोट : मूर्तिकला सेल्फ फाइनेंस कोर्स है और इसमें कुल 20 सीटें हैं। इस वर्ष केवल छह छात्रों ने ही एडमिशन लिया है।)