रायबरेली। जापानी इंसेफलाइटिस और एक्यूट इंसेफलाइटिस से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में स्थापित पीडियाट्रिक आईसीयू तीन माह बाद फिर शुरू हो गई है। बृहस्पतिवार को पांच गंभीर बच्चों को भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। हालांकि, स्टाफ की कमी बनी हुई है। किसी तरह से इसे शुरू कराया गया है। सीएमएस ने भर्ती प्रक्रिया के लिए शासन को पत्र भेजा है।
पीडियाट्रिक आईसीयू में 10 वेंटिलेटरों की व्यवस्था है। पीआईसीयू में लगे वेंटिलेटर चलाने की जिम्मेदारी डॉ. प्रशांत तिवारी को थी। मात्र एक चिकित्सक होने के कारण तीन माह पहले पीआईसीयू में बच्चों को भर्ती करने का काम बंद कर दिया गया था। सीएमओ के स्तर से दो चिकित्सकों की भर्ती किए जाने के बाद अब संविदा चिकित्सकों की रोस्टर से ड्यूटी लगाकर दोबारा इसे शुरू कराया गया है। बृहस्पतिवार को गुरुबख्शगंज निवासी अनिका (9 माह), खाली सहाट निवासी युग (2), राना नगर निवासी नित्य (2), डलमऊ निवासी आर्य (8 माह), डीह निवासी रुचि (3 माह) को भर्ती करके इलाज शुरू किया गया। पीआईसीयू शुरू होने के बाद गंभीर बच्चों को भले ही राहत मिली है।
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राहुल गांधी के सामने उठ चुका मसला
दो माह पहले दिशा की बैठक में सदन के नेता प्रतिपक्ष व सांसद राहुल गांधी के सामने पूर्व मंत्री व विधायक डॉ. मनोज कुमार पांडेय ने वेंटिलेटरों की बदहाली का मामला उठाया था। इसी के बाद से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हरकत में आ गया। सीडीओ के आदेश पर सीएमओ ने सीएमएस से सभी वेंटिलेटरों के संबंध में रिपोर्ट भी मांगी थी।
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2022 में हुआ था शुभारंभ
जिला अस्पताल में 2018 में तैयार पीडियाट्रिक आईसीयू को वर्ष 2022 में आनन-फानन में शुरू करा दिया गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अफसर स्टाफ की भर्ती कराना ही भूल गए। कोरोना काल में लगे कर्मियों से किसी तरह पीआईसीयू को संचालित कराया गया था। मानदेय बंद होने के कारण कर्मियों ने काम छोड़ दिया था। अब तक पीआईसीयू के लिए स्टाफ की भर्ती की प्रक्रिया पूरी नहीं कराई गई।
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उच्चाधिकारियों को भेजा है पत्र
तीन डॉक्टरों की व्यवस्था होने के बाद पीडियाट्रिक आईसीयू को शुरू करा दिया गया है। पांच बच्चों को भर्ती कराया गया है। स्टाफ की व्यवस्था के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। जल्द ही स्टाफ की व्यवस्था होते ही पीआईसीयू को प्रभावी ढंग से संचालित कराया जाएगा।
डॉ. प्रदीप अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल