बिहार की राजधानी पटना में पीएफआई के प्रशिक्षण शिविर में शामिल इसके एक सदस्य नुरुद्दीन जंगी को शनिवार तड़के यूपी एटीएस और बिहार पुलिस ने लखनऊ के मवैया मेट्रो स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया। नुरुद्दीन मूल रूप से बिहार के दरभंगा जिले के शेर मुहम्मद गली का रहने वाला है। वह लखनऊ में चारबाग स्थित मुस्लिम मुसाफिरखाना में ठहरा हुआ था।
एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया कि नुरुद्दीन पटना में अवैध तरीके से चलाए जा रहे पीएफआई के प्रशिक्षण शिविर में शामिल था और उसने लखनऊ में शरण ले रखी थी। पटना पुलिस को इसकी तलाश थी। नुरुद्दीन को पकड़ने के लिए पटना पुलिस ने एटीएस से सहयोग मांगा था।
पूछताछ में नुरुद्दीन ने बताया कि वह 2015 से पीएफआई के दरभंगा के जिलाध्यक्ष सनाउल्लाह के संपर्क में आया और पीएफआई की स्टूडेंट विंग एसडीपीआई से जुड़ा। उसके बाद से वह लगातार पीएफआई का सक्रिय सदस्य रहा। नुरुद्दीन 2020 में एसडीपीआई के बैनर तले विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुका है। उसे 600 वोट मिले थे।
पीएफआई से जुड़े लोगों पर दर्ज मुकदमों की करता है पैरवी
नुरुद्दीन दरभंगा के सीएन लॉ कॉलेज से 2017 में एलएलबी की डिग्री हासिल कर चुका है। पूछताछ में उसने बताया कि वह पीएफआई और एसडीपीआई से जुड़े लोगों पर दर्ज मुकदमों की पैरवी करता है।
बिहार पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर किया था खुलासा
बिहार पुलिस ने 14 जुलाई को पीएफआई द्वारा चलाए जा रहे प्रशिक्षण कैंप का खुलासा किया था, जिसमें डंडे चलाए जाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा था। इस दौरान दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिसमें अतहर परवेज और मुहम्मद जलालुद्दीन शामिल थे। पटना में प्रधानमंत्री के दौरे से ठीक पहले इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी हो गई थीं।
पीएफआई की गतिविधियों पर यूपी में एटीएस रख रही नजर
अब यूपी एटीएस भी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं यूपी में भी तो इस तरह का प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं चल रहा है। इसके लिए खुफिया विभाग भी पीएफआई से जुड़ी जानकारी जुटा रहा है। इससे पहले दिसंबर 2019 में पहली बार पीएफआई का नाम यूपी में हुए सीएए-एनआरसी विरोधी प्रदर्शन में सामने आया था। पुलिस ने अभियान चलाकर पूरे प्रदेश से सवा सौ से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था।