यूपीपीसीएल में पीएफ घोटाले का मामला गरमाया तो पुलिस को एक बार फिर इस केस की याद आई। आश्वासन समिति के लंबित केस के दस्तावेजों की तलाश में बुधवार को फिर संबंधित एफआईआर के विवेचक और जवाहर भवन के चौकी इंचार्ज सत्येंद्र तिवारी शक्तिभवन स्थित यूपीपीसीएल के कार्यालय पहुंचे, लेकिन कुछ भी हासिल नहीं हुआ।
हर बार टालमटोल करता रहा यूपीपीसीएल
यह पूरा मामला 18 साल पुराना है। 1 जुलाई 2001 को तत्कालीन एमएलसी ब्रज भूषण सिंह कुशवाहा और मानवेंद्र सिंह, विधायक जय प्रकाश व हरदेव सिंह ने उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद में 800 केवी अनपरा-उन्नाव पारेषण लाइन के 1100 टावरों की पेंटिंग में हुए 5000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच के लिए शासन को संयुक्त पत्र लिखा था।
पत्र पर जांच के आदेश हुए थे, लेकिन जांच की रफ्तार काफी सुस्त थी। एक साल तक जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो 23 अगस्त 2002 को विधायक नरेंद्र सिंह सिसौदिया ने विधानसभा में सवाल उठाया।
इसके जवाब में तत्कालीन उर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय ने बताया कि सतर्कता विभाग की संस्तुति के आधार पर आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश यूपीपीसीएल को दिए गए हैं।
साथ ही कुछ तकनीकी बिंदुओं पर आगे की जांच के लिए भी यूपीपीसीएल से कहा गया है। मामला आश्वासन समिति तक पहुंचा। आश्वासन समिति ने कई बार यूपीपीसीएल से घोटाले से संबंधित दस्तावेज मांगे, लेकिन यूपीपीसीएल की ओर से टाल-मटोल की जाती रही।
बाद में बताया गया कि फाइल खो गई है। जिसके बाद 28 मई 2018 को तहरीर देकर शासन के अनुसचिव ने यूपीपीसीएल के अज्ञात अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा कायम करा दिया।