लखनऊ। कैसरबाग निवासी बुजुर्ग रामविलास सोमवार को सिविल अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे। डॉक्टर ने जांच के लिए कई पैथोलॉजी टेस्ट लिखे। रामविलास जांच कराने के लिए पैथोलॉजी विभाग की कतार में लग गए। करीब आधे घंटे बाद जब उनका नंबर आया, तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि पहले पंजीकरण कराएं। इसके बाद वे फिर पंजीकरण काउंटर की लाइन में लगे। पंजीकरण के बाद वॉयल लेकर जब दोबारा नमूना देने पहुंचे, तो फिर से लंबी कतार में लगना पड़ा।
अस्पताल की यह अव्यवस्था मरीजों पर भारी पड़ रही है। जांच के लिए मरीजों को दो-दो बार कतार में लगना पड़ रहा है। पहले पंजीकरण और फिर नमूना देने के लिए। मरीजों का कहना है कि जांच प्रक्रिया में यह जटिल व्यवस्था गंभीर मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था मरीजों की सुविधा के लिए की गई है, ताकि जांच प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से हो सके।
सिविल अस्पताल की ओपीडी में हर दिन तीन से चार हजार मरीज पहुंचते हैं। इनमें से करीब तीन से चार सौ मरीजों को खून से जुड़ी जांच लिखी जाती है। मौजूदा व्यवस्था में मरीजों को पहले पंजीकरण काउंटर पर जाकर जांच का पंजीकरण कराना होता है। वहां से वॉयल मिलने के बाद दोबारा पैथोलॉजी कक्ष की लाइन में लगकर नमूना देना पड़ता है। इस दोहरी प्रक्रिया के कारण मरीजों को घंटों की मशक्कत करनी पड़ती है। कई बार कतार में खड़े मरीजों और कर्मचारियों के बीच नोकझोंक की नौबत भी आ जाती है।
लाइन में खड़े-खड़े बीत गए डेढ़ घंटे
आलमबाग निवासी नीता ने बताया कि मेडिसिन विभाग के डॉक्टर ने जांच लिखी थी। जब वह नमूना देने पहुंचीं, तो आधे घंटे लाइन में लगने के बाद बताया गया कि पहले वॉयल लेकर आना होगा। फिर वॉयल के लिए आधे घंटे दूसरी कतार में लगीं। उसके बाद दोबारा नमूना देने के लिए लाइन में लगना पड़ा। पूरी प्रक्रिया में डेढ़ घंटे से ज्यादा लग गया।
Iरक्त का नमूना देने के लिए मरीजों को दो बार लाइन में लगना पड़ रहा है, यह मेरी जानकारी में नहीं है। पता कराकर मरीजों की सहूलियत के लिए उचित व्यवस्था की जाएगी।I
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- डॉ. कजली गुप्ता, निदेशक सिविल अस्पतालI