अब बच्चों को डॉक्टर को दिखाने के लिए लाइन नहीं लगानी होगी। हर मरीज को एक टोकन नंबर देकर लाइन में लगने के झंझट से बचाया जाएगा।
कॉरपोरेट स्टाइल में मरीजों को देखने का काम अब राजधानी के सिविल अस्पताल में बाल रोग विभाग की नई विंग में होगा।
उद्घाटन के साथ ही इस बाल रोग विभाग में पीडियाट्रिक वेंटीलेटर, सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम, एनआईसीयू और स्ट्रेचर ट्रॉली लिफ्ट लगाने की कवायद शुरू हो गई है।
यूपी में बच्चों के लिए खास तौर पर बनने वाली सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र में पहली विंग मानी जा रही है। मंगलवार को उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन व अन्य मंत्रियों के साथ बाल रोग विभाग की तीन मंजिला इमारत का मुआयना किया।
अधिकारियों ने उन्हें बताया कि हर मरीज को एक टोकन नंबर मिलेगा। डॉक्टर के पास रखी मशीन से नए मरीज का नंबर दबाने पर ट्रिंग की आवाज आएगी। इसके साथ ही ओपीडी के बाहर लगी एलईडी डिस्प्ले पर नंबर फ्लैश होगा। इसके बाद मरीज डॉक्टर को दिखा सकेगा। यह इलाज पूरी तरह मुफ्त होगा।
स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए चार मंजिला इमारत को पूरी तरह एसी बनाया गया है। इसमें भूतल पर पर्चा बनने, टीकाकरण और दवा वितरण का काम होगा। पहले तल पर ओपीडी बनाई गई है।
यहां बीमार बच्चों को देखा जाएगा। दूसरे और तीसरे तल पर मरीजों को भर्ती करने के लिए वार्ड बनाए गए हैं। 50 बिस्तर की क्षमता वाले वार्ड में बच्चों को आकर्षित करने के लिए रंगीन बेडशीट के साथ दीवारों पर उनके फेवरेट हीरो और कार्टून की तस्वीर चिपकाई गई है।
बीमार बच्चों को देखने के लिए 10 डॉक्टरों की टीम मौजूद रहेगी। बच्चों को वर्तमान ओपीडी में भी दिखाया जा सकता है। जरूरी होने पर उन्हें नई विंग में भर्ती करा दिया जाएगा।