सहायक पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव ने बताया कि घटना दोपहर करीब ढाई बजे हुई। आईएएस उमेश प्रताप सिंह उस वक्त बेटे आशुतोष सिंह, नौकर तुलसीराम और विकास के साथ मकान के भूतल पर थे जबकि अनीता पहली मंजिल पर स्थित कमरे में थीं।
घर पर आशुतोष का एक दोस्त भी मौजूद था। आशुतोष का कहना है कि मां के कमरे से गोली चलने आवाज आई तो वह उनके कमरे की तरफ भागा। वहां उसने पिता को कमरे का दरवाजा तोड़ते हुए देखा। भीतर अनीता सोफे पर खून से लथपथ पड़ी थीं।
आनन-फानन उन्हें एक निजी अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने ट्रामा सेंटर ले जाने की सलाह दी। ट्रामा सेंटर में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। करीब चार बजे परिवारीजनों ने पुलिस से संपर्क किया तो हड़कंप मच गया। पुलिस-प्रशासन के अधिकारी ट्रामा सेंटर व आईएएस के घर पहुंच गए।
आईएएस उमेश प्रताप सिंह ने पुलिस को बताया कि अनीता करीब दो साल से अवसादग्रस्त थीं और उनका उपचार भी चल रहा था। पुलिस को उनके कमरे से मानसिक उपचार की कुछ दवाएं भी मिली हैं।
सहायक पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मौके से अनीता सिंह की लाइसेंसी पिस्टल व एक खोखा मिला है। पुलिस ने कमरा खंगाला लेकिन कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि शुरुआती पड़ताल में अनीता के खुदकुशी करने की बात सामने आ रही है।
हालांकि, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने सभी बिंदुओं पर जांच करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अनीता के परिवारीजनों से भी संपर्क किया गया है।