मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग में आपातकालीन बैठक बुलाकर मंगलवार को दोनों पालियों के पेपर की परीक्षा निरस्त करने का निर्णय लिया गया। हालांकि, अभ्यर्थी इससे संतुष्ट नहीं थे। हजारों अभ्यर्थी यूपीपीएससी पहुंच गए और छह जुलाई तक आयोजित होने वाली पूरी परीक्षा निरस्त करने की मांग की। अभ्यर्थियों ने वहां बवाल शुरू कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। आयोग में बड़ी संख्या में फोर्स तैनात कर दी गई है। वहीं, आयोग के अध्यक्ष अनिरुद्ध यादव के आवास की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। पीसीएस-2017 की मुख्य परीक्षा के पहले दिन सोमवार को सामान्य अध्ययन प्रथम एवं द्वितीय प्रश्नपत्र की परीक्षा थी। इस परीक्षा में कुल 13664 अभ्यर्थियों को शामिल होना था, जिनमें से 12281 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए और 1383 ने परीक्षा छोड़ दी थी।
‘एक परीक्षा केंद्र में प्रथम पाली में त्रुटिवश सामान्य हिंदी के स्थान पर निबंध का पेपर खुल गया। इससे अभ्यर्थियों ने परीक्षा का बहिष्कार कर दिया। इसी वजह से आयोग ने प्रदेश भर में दोनों पालियों का पेपर निरस्त किए जाने का निर्णय लिया है। इन दोनों प्रश्नपत्रों की पुनऱ् परीक्षा की तिथि शीघ्र घोषित की जाएगी। आगामी तिथियों की शेष परीक्षाएं पूर्व निर्धारित कार्यक्त्रस्म के अनुसार ही आयोजित की जाएंगी।’ जगदीश, सचिव उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग
देवेंद्र कुमार सिंह, केंद्र प्रभारी, जीआईसी ने बताया कि, ‘केंद्र में पेपर पहुंचाने की जिम्मेदारी आयोग की है। पहली पाली में सामान्य हिंदी की परीक्षा के लिए जो पेपर आए, वे डिब्बे में बंद थे और डिब्बे बोरे में रखे हुए थे। डिब्बे और बोरे पर लगी स्लिप पर तिथि, प्रथम पाली और समय लिखा हुआ था। डिब्बे खोलकर पेपर बांट दिए गए। इस प्रक्त्रिस्या की वीडियोग्राफी भी हुई है। इसमें केंद्र से कोई गलती नहीं हुई है।’