लखनऊ। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए 10 से 12 दिन बाद की तारीख मिल रही है। मजबूरी में उन्हें निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है। कई अस्पतालों में सप्ताह में सिर्फ दो दिन जांच हो रही है। वहीं, उपलब्ध विशेषज्ञों को जांच के बजाय दूसरे कामों में लगाया गया है। इससे मरीज एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटक रहे हैं।
सिविल अस्पताल में 10 दिन की वेटिंग
सिविल अस्पताल की ओपीडी में मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए 10-12 दिन बाद की तारीख मिल रही है। गंभीर मरीजों की ही जांच उसी दिन हो पा रही है। अस्पताल में दो रेडियोलॉजिस्ट तैनात हैं। वजीर हसन रोड निवासी अमित को डॉक्टर ने बीमारी के आधार पर अल्ट्रासाउंड लिखी। जांच काउंटर पर पहुंचने पर उन्हें दो सितंबर की तारीख दी गई। इसी तरह कई मरीजों को 10 से 12 दिन बाद की तारीख मिल रही है।
रेडियोलॉजिस्ट दूसरे काम में लगे
रिजर्व पुलिस लाइन में लंबे समय से तैनात रेडियोलॉजिस्ट डॉ. शशिकांत को सीएमओ ने बीते माह आलमबाग के 50 बेड संयुक्त चिकित्सालय से संबद्ध कर दिया था, लेकिन एक माह बाद भी उन्होंने अस्पताल में जांच शुरू नहीं की। सीएमएस ने पुलिस लाइन को पत्र भेजने के साथ अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी। इसके बाद भी डॉक्टर अस्पताल नहीं पहुंचे। इस कारण अल्ट्रासाउंड मशीन बंद पड़ी है।
वहीं, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. मोहित सिंह आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और मरीजों की आभा आईडी बनवा रहे हैं।
सोनोलॉजिस्ट कुष्ठ रोगी खोजने में लगे
अपर निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता ने सोनोलॉजिस्ट डॉ. हवलदार भारतीय को चार माह पहले ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय में संबद्ध किया था, लेकिन वह भी सेवा देने नहीं पहुंचे। सीएमओ ने उन्हें उप जिला कुष्ठ अधिकारी बना दिया है। अब वह अल्ट्रासाउंड के बजाय जिले में कुष्ठ रोगियों को खोज रहे हैं।
चार सीएचसी में मशीन तक नहीं
नगराम, बेहटा, गोसाईंगंज और अलीगंज सीएचसी में कई माह से अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है। वहीं माल, मलिहाबाद, रेडक्रॉस, मोहनलालगंज और सरोजनीनगर सीएचसी में मशीन होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट या सोनोलॉजिस्ट नहीं होने से जांच बंद है।
Iजो भी रेडियोलॉजिस्ट व सोनोलॉजिस्ट अपनी सेवा नहीं दे रहे हैं, उन्हें नोटिस दिया जाएगा। सभी को अस्पताल से संबद्ध किया जाएगा, ताकि मरीजों को उनकी सेवा का लाभ मिल सके।I
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- डॉ. एनबी सिंह, सीएमओI